महाराष्ट्र में कपास एवं सोयाबीन की सरकारी खरीद में अनियमितता पर बवाल

12-Dec-2025 04:25 PM

नागपुर। महाराष्ट्र में कपास तथा सोयाबीन उत्पादकों के प्रति राज्य सरकार की बेरुखी के विरोध में विपक्षी विधायकों को विधानसभा में यह कहते हुए वाक आउट कर दिया कि इन दोनों महत्वपूर्ण खरीफ फसलों की सरकारी खरीद में भारी अनियमितता बरती जा रही है।

हालांकि महाराष्ट्र के विपणन मंत्री ने इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि सरकारी एजेंसियां किसानों से नियमित रूप से कपास और सोयाबीन की खरीद कर रही है मगर एक विपक्षी विधायक ने कहा कि विपणन (मार्केटिंग) मंत्री को वास्तविकता की जानकारी ही नहीं है कि मंडियों में क्या हो रहा है। 

विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया है कि मंडियों में खरीद मूल्य एवं गारंटी मूल्य के बीच भारी अंतर बना हुआ है। राज्य के कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में कपास की सरकारी खरीद के लिए अभी तक क्रय केन्द्र स्थापित नहीं किए गए हैं

जबकि कुछ अन्य भागों में क्रय केन्द्रों को क्रियाशील बनाने में देर की जा रही है। इसी तरह सोयाबीन का थोक मंडी भाव काफी नीचे चल रहा है और राज्य सरकार किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) का लाभ देने में विफल हो रही है। 

दिलचस्प तथ्य यह है कि विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान मार्केटिंग मंत्री ने विपक्षी नेताओं के सवालों- शिकायतों का जो जवाब दिया उससे सत्ता पक्ष के  विधायक भी संतुष्ट नहीं थे और उन्होंने इस पर नाखुशी भी जाहिर की।

इसके बाद विधानसभा के अध्यक्ष ने कहा कि सम्बन्धित विधायकों की एक बैठक उनके चैम्बर में आयोजित की जाएगी और उसमें तमाम शिकायतों पर गम्भीरतापूर्वक विचार-विमर्श किया जाएगा। 

ध्यान देने वाली बात है कि महाराष्ट्र देश में कपास एवं सोयाबीन का दूसरा सबसे प्रमुख उत्पादक राज्य है और वहां इसकी सरकारी खरीद भी जारी है।

केन्द्र सरकार ने राज्य में 18.51 लाख टन सोयाबीन की खरीद की अनुमति दी है जबकि इसका न्यूनतम समर्थन मूल्य 5328 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया है।

लेकिन राज्य में इस महत्वपूर्ण तिलहन सरकारी खरीद की गति काफी धीमी है। विपक्षी नेताओं का कहना था कि राज्य सरकार किसानों के साथ भद्दा मजाक कर रही है।