महाराष्ट्र में रबी फसलों का रकबा गत वर्ष से 3 लाख हेक्टेयर पीछे
10-Dec-2025 12:43 PM
मुम्बई। दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन के दौरान जोरदार बारिश होने तथा भयंकर बाढ़ एवं जल जमाव की गंभीर समस्या रहने से खरीफ फसलों को काफी नुकसान होने के बाद महाराष्ट्र में रबी फसलों के बिजाई में किसानों द्वारा भारी दिलचस्पी दिखाई जाने की उम्मीद की जा रही थी
लेकिन इसके विपरीत राज्य में रबी फसलों में गिरावट का माहौल देखा जा रहा है। राज्य कृषि विकास के नवीनतम साप्तहिक आंकड़ों से पता चलता है कि चालू वर्ष के दौरान 9 दिसम्बर 2025 तक महराष्ट्र में रबी फसलों का कुल बिजाई क्षेत्र 43.34 लाख हेक्टेयर ही पहुंच सका जो पिछले साल की समान अवधि के बिजाई क्षेत्र 46.36 लाख हेक्टेयर से 3.02 लाख हेक्टेयर कम है।
आधिकरिक आंकड़ों के मुताबिक पिछले साल की तुलना में मौजूदा रबी सीजन के दौरान महाराष्ट्र में गेहूं का उत्पादन क्षेत्र 7.32 लाख हेक्टेयर से सुधरकर 7.43 लाख हेक्टेयर तथा मक्का का बिजाई क्षेत्र 2.96 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 3.50 लाख हेक्टेयर पहुंचा
लेकिन ज्वार का क्षेत्रफल 13.19 लाख हेक्टेयर से लुढ़ककर 11.13 लाख हेक्टेयर पर अटकने से अनाजी फसलों का कुल रकबा 23.52 लाख हेक्टेयर से घटकर 22.14 लाख हेक्टेयर रह गया।
इसी तरह महाराष्ट्र में दलहनों का सकल उत्पादन क्षेत्र भी गत वर्ष के 22.43 टन हेक्टेयर से घटकर इस बार 20.90 लाख हेक्टेयर पर आ गया।
इसके तहत चना का रकबा 1.51 लाख हेक्टेयर से गिरकर 20.01 लाख हेक्टेयर तथा दलहन फसलों का क्षेत्रफल 92 हजार हेक्टेयर से फिसलकर 89 हजार हेक्टेयर पर अटक गया।
महाराष्ट्र में रबी सीजन के दौरान तिलहन फसलों की खेती सीमित क्षेत्रफल में होती है जिससे तिल एवं सूरजमुखी सहित अन्य तिलहन फसलें शामिल हैं। इसका कुल उत्पादन क्षेत्र 30 हजार हेक्टेयर पर पहुंचा है जो गत वर्ष के रकबा 40 हजार हेक्टेयर से काफी कम है।
महाराष्ट्र रबीकालीन ज्वार एवं चना के शीर्ष उत्पादक राज्यों में शामिल है मगर चालू रबी सीजन के दौरान इन दोनों फसलों के बिजाई क्षेत्र में गिरावट देखी जा रही है।
दूसरी ओर गेहूं एवं मक्का की बिजाई में किसानों का आकर्षण बरकरार है। फिलहाल राज्य में रबी फसलों की बिजाई जारी है जिससे आगामी समय में क्षेत्रफल में सुधार आने की उम्मीद की जा रही है।
