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02-Nov-2026 03:44 PM
नई दिल्ली। मक्का के वैश्विक उत्पादन में भारत अग्रणी देशों की सूची में तो शामिल हो चुका है लेकिन घरेलू मांग एवं खपत में हो रही जबरदस्त बढ़ोत्तरी को देखते हुए यहां नियमित रूप से इसका उत्पादन बढ़ाने की आवश्यकता है।
पहले भारत से अच्छी मात्रा में मक्का का निर्यात होता था मगर अब यह काफी घट गया है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2021-22 के दौरान भारत से करीब 37 लाख टन मक्का का शानदार निर्यात हुआ था जबकि महज तीन वर्षों के बाद घरेलू उत्पादन में अच्छी वृद्धि होने के बाद इसका शिपमेंट घटकर आधा से भी कम रह गया।
मोटे अनाजों के परिवार के सबसे प्रमुख सदस्य- मक्का की खेती पहले पशु आहार, पॉल्ट्री फीड एवं स्टार्च निर्माण उद्योग की मांग एवं सामान्य मानवीय जरूरत को पूरा करने के लिए होती थी और इसका बाजार भाव नरम रहता था। लेकिन बाद में एथनॉल निर्माण के लिए इसकी मांग तेजी से बढ़ने लगी जिससे अन्य उद्योगों के लिए पर्याप्त आपूर्ति नहीं होने की समस्या बढ़ गई।
देखते ही देखते मक्का से एथनॉल का उत्पादन गन्ना अवयवों से उत्पादित एथनॉल से भी आगे बढ़कर प्रथम स्थान पर पहुंच गया। इस बार सरकार ने सी हैवी शीरा को छोड़कर अन्य गन्ना अवयवों से एथनॉल के उत्पादन पर प्रतिबंध लगा दिया है। लेकिन हैरत की बात है कि मांग एवं खपत बढ़ने के बावजूद मक्का की कीमतों में अपेक्षित तेजी नहीं आ सकी और न ही सरकार ने इसके न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में कोई खास वृद्धि की।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 2025-26 के सम्पूर्ण सीजन के दौरान भारत में मक्का का उत्पादन तेजी से बढ़कर 551 लाख टन के सर्वकालीन सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गया जो 2014-15 के उत्पादन 236.70 लाख टन के दोगुने से भी ज्यादा था।
इसके साथ ही भारत दुनिया में मक्का का छठा सबसे बड़ा उत्पादक देश बन गया। लेकिन 2026-27 सीजन के दौरान इसके घरेलू उत्पादन में भारी गिरावट आने की संभावना है।