मक्का, सोयाबीन एवं गेहूं की कीमतों में उतार-चढ़ाव के आसार

10-Dec-2025 04:31 PM

शिकागो। अमरीकी कृषि विभाग (उस्डा) ने दिसम्बर 2025 की रिपोर्ट में जो आंकड़ा प्रस्तुत किया है उससे संकेत मिलता है कि आगामी महीनों के दौरान मक्का के दाम में कुछ तेजी तथा गेहूं के भाव में थोड़ी नरमी आ सकती है जबकि सोयाबीन का मूल्य काफी हद तक स्थिर रह सकता है।

उस्डा ने अमरीकी मक्का का निर्यात अनुमान 12.50 करोड़ बुशेल बढ़ाकर 3.20 अरब बुशेल के रिकॉर्ड स्तर पर निर्धारित किया है जो पिछले साल से 12 प्रतिशत ज्यादा है। दूसरी ओर इसका अंतिम बकाया स्टॉक 12.50 करोड़ बुशेल घटाकर 2.09 अरब बुशेल नियत किया है। वैश्विक बाजार में अमरीकी मक्का की मांग बढ़ने की संभावना है जिससे इसका भाव कुछ तेज हो सकता है।

समीक्षकों के मुताबिक ब्राजील में अब एथनॉल निर्माण एवं पशु आहार उद्योग में मक्का की खपत तेजी से बढ़ती जा रही है जिससे वहां निर्यात उद्देश्य के लिए इसका कम स्टॉक उपलब्ध रहेगा और इससे अमरीका को अपना उत्पाद वैश्विक बाजार में बेचने के लिए उसकी कठिन प्रतिस्पर्धा का सामना नहीं करना पड़ेगा।

उपयोग के सापेक्ष मक्का के स्टॉक की स्थिति भी जटिल रहने की संभावना है। अमरीका और चीन के बाद ब्राजील दुनिया में मक्का का तीसरा सबसे प्रमुख उत्पादक देश है जबकि इसके निर्यात में दूसरे नम्बर पर रहता है।

अमरीका के घरेलू प्रभाग में भी मक्का की मांग 3 प्रतिशत बढ़कर 5.60 अरब बुशेल पर पहुंचने का अनुमान लगाया गया है। 

उस्डा ने अमरीका में सोयाबीन की बैलेंस शीट में कोई बढ़ा बदलाव नहीं किया है इसलिए इसकी कीमतों में ज्यादा उतार-चढ़ाव आने की संभावना नहीं है।

अमरीका का ध्यान चीन के बाजार पर केन्द्रित है जबकि वहां असमंजस की स्थिति बनी हुई है। इसके अलावा लैटिन अमरीकी देशों और खासकर ब्राजील तथा अर्जेन्टीना में उत्पादन के परिदृश्य पर शहरी नजर रखी जा रही है। वहां सोयाबीन की बिजाई पहले ही आरंभ हो चुकी है और ब्राजील में तो बिजाई अब समाप्त होने वाली है।

चीन में ब्राजील से विशाल मात्रा में सोयाबीन का आयात हो रहा है। सोयाबीन की बिजाई ब्राजील में 10 प्रतिशत तथा अर्जेन्टीना में 50 प्रतिशत से अधिक पूरी हो चुकी है। 

जहां तक गेहूं का सवाल है तो उस्डा ने इसकी बैलेंस शीट को भी पिछले स्तर पर कायम रखा है। वहां गेहूं का अंतिम बकाया स्टॉक 90.10 करोड़ बुशेल रहने की संभावना व्यक्त की गई है। जो पिछले छह साल का सबसे ऊंचा स्तर है। इससे कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।