मूल्य संवर्धित गेहूं उत्पादों के नियंत्रण मुक्त निर्यात की अनुमति देने का आग्रह
26-Sep-2025 07:55 PM
नई दिल्ली। रोलर फ्लोर मिलर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष नवनीत चितलांगिया ने केन्द्र सरकार से खुले सामान्य लाइसेंस (ओजीएल) के तहत मूल्य संवर्धित गेहूं उत्पादों के निर्यात की अनुमति देने का जोरदार आग्रह किया है।
उनका कहना है कि घरेलू प्रभाग में आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति को सुगम बनाए रखने के लिए गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध लगाए रखना सरकार का सही कदम माना जा सकता है लेकिन आटा, मैदा एवं सूजी जैसे गेहूं उत्पादों के निर्यात पर पाबंदी को बरकरार नहीं रहना चाहिए।
यदि सरकार को निर्यात खुलने पर घरेलू बाजार में गेहूं उत्पादों का दाम बढ़ने की चिंता है तो सरकार मात्रात्मक नियंत्रण के साथ इसके शिपमेंट की अनुमति दे सकती है।
हालांकि गेहूं का अंतर्राष्ट्रीय बाजार मूल्य अभी नीचे चल रहा है लेकिन यह ध्यान रखना आवश्यक है कि भारतीय चक्की आटा तथा अन्य गेहूं उत्पादों का अपना निश्चित बाजार है और खासकर जिन देशों में भारतीय अधिक संख्या में रह रहे हैं वहां इसकी मजबूत मांग बनी रहती है।
फेडरेशन के अध्यक्ष गेहूं की अर्थव्यवस्था परम्परागत रूप से भारत की खाद्य सुरक्षा एवं एफएमपीजी क्षेत्र की प्रगति के केन्द्र में रही है। पिछले कुछ वर्षों से गेहूं के दाम में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है,
सरकार की तरफ से बार-बार नीतिगत हस्तक्षेप हो रहा है और वैश्विक स्तर पर गेहूं की आपूर्ति श्रृंखला में बाधा पड़ रही है। जो एफएमसीजी कंपनियां अपने उत्पादों के निर्माण के लिए गेहूं पर आश्रित हैं उनके लिए ये उतार-चढ़ाव लागत खर्च को पीछे प्रभावित करते रहे हैं। इससे उनकी योजना (रणनीति) तथा प्रतिस्पर्धी क्षमता पर भी असर पड़ रहा है।
जीएसटी की दर में संशोधन- परिवर्तन की वर्षा करते हुए फेडरेशन के अध्यक्ष ने कहा कि बिस्कुट, पास्ता, नूडल्स, रोटी, प्रोट्ठा एवं गेहूं से निर्मित होने वाले उत्पादों पर जीएसटी की दर में कटौती का निर्णय सही समय पर उठाया गया एक अनुकूल कदम है। इससे ये उत्पाद सस्ते होंगे और इसकी मांग एवं खपत बढ़ जाएगी।
सरकार को गेहूं के बफर स्टॉक का ढांचा संशोधित करने पर विचार करना चाहिए। खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केन्द्रीय पूल में गेहूं की पर्याप्त स्टॉक रखा जाना आवश्यक है लेकिन इसका स्टॉक बढ़ाने पर ध्यान देना आवश्यक है।
