मेप तथा निर्यात शुल्क हटने से भारतीय चावल की प्रतिस्पर्धी क्षमता बढ़ी

08-Nov-2024 12:13 PM

नई दिल्ली। केंद्र सरकार द्वारा और बासमती संवर्ग के सफेद चावल पर लागू 490 डॉलर प्रति टन के न्यूनतम निर्यात मूल्य (मेप) तथा सेला चावल पर लगे 20 प्रतिशत के निर्यात शुल्क को हटाए जाने से वैश्विक निर्यात बाजार में भारतीय चावल की प्रतिस्पर्धी क्षमता काफी बढ़ गई है और इसका निर्यात ऑफर मूल्य सबसे आकर्षक हो गया है। बासमती चावल के लिए नियत 950 डॉलर प्रति टन का न्यूनतम मूल्य भी हटाया जा चूका है। इसके फलस्वरूप भारी चावल अब पूरी तरह शुल्क मुक्त और नियंत्रण मुक्त हो गया है। 

बांग्ला देश सरकार द्वारा 50 हजार टन गैर बासमती सेला चावल के आयात के लिए जारी टेंडर में भारतीय कम्पनियो ने सबसे कम मूल्य का ऑफर दिया। एक भारतीय कम्पनी का निर्यात ऑफर मूल्य 477 डॉलर प्रति टन था जिसमे चटगांव और मोंगला बंदरगाहों तक पहुंच का खर्च भी शामिल था। उम्मीद की जा रही है कि यह टेंडर इस कम्पनी को हासिल हो जायेगा। 

बांग्ला देश सरकार ने अनेक चरणों में कुल मिलाकर 5 लाख टन से अधिक चावल का आयात करने का निर्णय किया है इस बीच खाद्य मंत्रालय ने 4 नवम्बर को 50 हजार टन चावल की आपूर्ति के लिए एक अन्य टेंडर जारी कर दिया जिसे 18 नवम्बर को खोला जायेगा। 

पिछले टेंडर में 499.77 डॉलर प्रति टन का ऑफर मूल्य जमा करने वाली कम्पनी का कहना है कि उसने चार देशो भारत, म्यांमार, थाईलैंड, और वियतनाम में से किसी भी देश के चावल की आपूर्ति का ऑफर दिया था लेकिन प्रर्तिस्पर्धा इतनी सख्त है कि  रायपुर (छत्तीसगढ़) की एक अग्रणी निर्यातक फर्म का 477.45 डॉलर, दूसरे का 490.56 डॉलर तथा तीसरे का 479.50 डॉलर प्रति टन दर्ज किया गया। 

उल्लेखनीय है कि 20 अक्टूबर को बांग्ला देश के खाद्य मंत्रालय ने 50 हजार टन सेला चावल की खरीद के लिए वैश्विक टेंडर जारी किया था ,इसमें से 30 हजार टन का शिपमेंट चटगांव बंदरगाह तथा 20 हजार टन का शिपमेंट मोंगला बंदरगाह पर करने की शर्त रखी गई थी।