मार्च से नवम्बर तक घरेलू प्रभाग में 98.50 लाख टन सरसों की आवक
02-Dec-2024 05:09 PM
जयपुर । रबी सीजन की सबसे महत्वपूर्ण तिलहन फसल की बिजाई चल रही है जबकि आपूर्ति का ऑफ सीजन होने से मंडियों में इसकी आवक घटती जा रही है।
जयपुर के चांदपोल की अनाज मंडी में स्थित लोकप्रिय फर्म मरुधर ट्रेडिंग एजेंसी के मैनेजिंग डायरेक्टर अनिल चतर द्वारा संकलित आंकड़ों से पता चलता है कि चालू वर्ष में मार्च से नवम्बर के दौरान थोक मंडियों एवं सरकारी क्रय केन्द्रों पर कुल मिलाकर 98.50 लाख टन सरसों की आवक हुई।
मंडियों में मार्च में 15.50 लाख टन, अप्रैल में 15 लाख टन, मई में 11 लाख टन, जून में 9 लाख टन, जुलाई में 8.50 लाख टन, अगस्त में 6 लाख टन, सितम्बर तथा अक्टूबर में 5-5 लाख टन एवं नवम्बर में 3.50 लाख टन सरसों की आवक हुई जबकि सरकारी क्रय केन्द्रों पर मार्च में 10 हजार टन, अप्रैल में 13.80 लाख टन, मई में 5.60 लाख टन एवं जून में 50 हजार टन की आपूर्ति दर्ज की गई।
को 108 लाख टन के स्टॉक में से 98.50 लाख टन की आवक होने के बाद 1 दिसम्बर को किसानों के पास 9.50 लाख टन सरसों का स्टॉक बच गया।
नैफेड एवं हैफेड जैसी सरकारी एजेंसियों के पास पुराने एवं नए माल को मिलाकर 27.50 लाख टन सरसों का स्टॉक मौजूद था जिसमें से 13 लाख टन की बिक्री हो गई और अब उसके पास 14.50 लाख टन का स्टॉक बचा हुआ है।
मार्च से नवम्बर 2024 के दौआन 92 लाख टन सरसों की क्रशिंग होने का अनुमान लगाया गया है जिसका मतलब यह हुआ कि मिलर्स एवं स्टॉकिस्टों के पास सीमित मात्रा में स्टॉक बचा हुआ है। यह 4 लाख टन के आसपास बताया जा रहा है।
इस तरह सरकारी एजेंसियों के पास 14.50 लाख टन, उत्पादकों के पास 9.50 लाख टन एवं मिलर्स / स्टॉकिस्टों के पास 4 लाख टन को मिलाकर देश में 1 दिसम्बर 2024 को कुल 28 लाख टन सरसों का स्टॉक बचा हुआ था।
सरसों की अगली नई फसल की आवक फरवरी में शुरू होगी जबकि मार्च में नया मार्केटिंग सीजन आरंभ होने पर आपूर्ति की मात्रा एवं रफ्तार काफी बढ़ जाएगी।
मंडियों में घटती आवक को देखते हुए सरसों की कीमतों में मजबूती बरकरार रहने की संभावना है। सरकार के पास पर्याप्त स्टॉक मौजूद है इसलिए क्रशर्स- प्रोसेसर्स को कच्चे माल का अभाव नहीं होगा। सरसों का संशोधित उत्पादन 2023-24 के सीजन में 115 लाख टन आंका गया है।
