मसालों के शुल्क मुक्त आयात प्राधिकार पर डीजीएफटी के स्पष्टीकरण
26-Sep-2025 04:35 PM
नई दिल्ली। विदेशों से शुल्क मुक्त आयात प्राधिकार (डीएफआईए) स्कीम के अंतर्गत मसालों के आयात के सम्बन्ध में विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी ) द्वारा चालू सप्ताह के आरंभ में एक महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण जारी किया गया।
डीजीएफटी के उस सर्कुलर में कहा गया है कि डीएफआईए स्कीम के अंतर्गत आयात के लिए कई मसाले मान्य नहीं हैं। इसमें कालीमिर्च, इलायची, अदरक (सौंठ) एवं लहसुन आदि मसाले शामिल हैं।
सर्कुलर में दिए गए स्पष्टीकरण के अनुसार सभी मसालों, चाहे उसका उपयोग किसी भी तरह से (यहां तक की फ्लेवरिंग एजेंट के तौर पर भी) करने का इरादा हो, को अनुसूची (परिशिष्ट) 4 के क्रमांक 1 के तहत शामिल माना जाएगा।
इसके साथ-साथ परिशिष्ट 4 जे में सूचीबद्ध किसी भी वस्तु (मसाले) का आयात सशर्त किया जा सकेगा। आयात-पूर्व शर्तों वाले इनपुट के लिए शुल्क मुक्त आयात प्राधिकार जारी नहीं किया जा सकता है।
इसी तरह विदेश व्यापार नीति 2023 के पैरा 4.26 (4) के अनुरूप जहां वास्तविक उपयोगकर्ता की शर्त लागू अथवा निर्धारित हैं और मानक इनपुट- आउटपुट के नियम भी प्रभावी है वहां प्राधिकार जारी नहीं किया जाएगा।
इसे इस तरह समझा जा सकता है कि परिशिष्ट 4 जे (4 J) के क्रमांक 1 में श्रेणीबद्ध मसालों को खास-खास उपयोग के आधार पर अग्रिम प्राधिकार के लिए विभिन्न निर्यात दायित्व अवधियों के साथ उप श्रेणियों में विभाजित किया गया है।
आमतौर पर मसालों के शुल्क मुक्त आयात की अनुमति इस शर्त पर दी जाती है कि आयातक या तो आयातित मसालों के मूल्य संवर्धित उत्पादों का निर्माण करके उसका एक निश्चित अवधि में निर्यात करेंगे अथवा उससे मसाला तेलों एवं ओलियोरेसिन का निर्माण करेंगे।
क्रमांक 1 (ए) में कालीमिर्च, इलायची, तथा लालमिर्च के लिए निर्यात दायित्व की अवधि निर्धारित की गई है जब उसका इस्तेमाल मूल्य संवर्धन के लिए किया जाए अथवा मसाला तेलों एवं ओलियोरेसिन के निर्माण में हो।
इसी तरह क्रमांक 1 (बी) में कालीमिर्च, इलायची एवं लालमिर्च को छोड़कर अन्य मसालों के निर्यात दायित्व की समय सीमा नियत की गई है जबकि क्रमांक 1 के ए एवं बी श्रेणी में जिन मसालों का नाम शामिल नहीं है उसे क्रमांक 1 (सी) में सम्मिलित किया गया है लेकिन इसके लिए भी शर्त वही रहेगी जो ए तथा बी के मसालों के लिए नियत है।
