म्यांमार एवं अफ्रीकी देशों के साथ दलहन आयात के करार की अवधि बढ़ने की उम्मीद

06-Dec-2025 12:35 PM

नई दिल्ली। भारत सरकार द्वारा म्यांमार, मोजाम्बिक एवं मलावी के साथ सरकारी स्तर पर दलहन आयात के लिए किए गए पंचवर्षीय करार की समयसीमा को आगे बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है जिसकी अवधि जल्दी ही समाप्त होने वाली है।

वरिष्ठ आधिकारिक सूत्रों के अनुसार इन देशों से दलहन आयात के समझौते की समयावधि को वित्त वर्ष 2025-26 से अगले पांच साल तक बढ़ाये जाने की उम्मीद है।

हालांकि अंतर मंत्रालयी समिति इस समय सीमा के विस्तार को पहले ही स्वीकृति प्रदान कर चुकी है लेकिन इस पर अंतिम आदेश जारी करने के लिए तीनों आपूर्तिकर्ताओं देशों- म्यांमार, मोजाम्बिक एवं मलावी के साथ सम्पर्क करने एवं कूटनीतिक (राजनयिक) स्तर पर विचार-विमर्श करने की आवश्यकता पड़ेगी।

विदेश मंत्रालय इन देशों के साथ बातचीत करेगा और दोनों पक्षों की सहमति बनने के बाद ही सरकार इस करार की समय सीमा को बढ़ाने की औपचारिक घोषणा करेगी।  

उल्लेखनीय है कि भारत ने इन देशों के साथ आसान शर्तों पर उड़द एवं तुवर की एक निश्चित वार्षिक मात्रा के आयात का करार कर रखा है। पांच वर्ष पूर्व यह समझौता किया गया था और उसमें यह प्रावधान था कि आवश्यकता पड़ने पर दोनों पक्षों की सहमति से इसकी समयावधि के विस्तार का निर्णय लिया जाएगा।

इस करार के तहत भारत में प्रति वर्ष म्यांमार से एक लाख टन तुवर एवं 2.50 लाख टन उड़द तथा अफ्रीकी देश मोजाम्बिक से 2 लाख टन तुवर और मलावी से 50 हजार टन तुवर का आयात हो रहा है। इस तरह समझौते के अंतर्गत कुल मिलाकर 3.50 लाख टन तुवर एवं 2.50 लाख टन उड़द के वार्षिक आयात का प्रावधान शामिल है।

समझा जाता है कि यदि करार की समयावधि को आगे बढ़ाया जाता है तो दलहनों के आयात की मात्रा को मौजूद स्तर पर ही बरकरार रखा जाएगा।

लेकिन फिलहाल इसकी प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है और यह देखना होगा कि निर्यातक देश इसके लिए राजी होते हैं या नहीं। वैसे इन देशों की सहमति आसानी से प्राप्त होने की उम्मीद है क्योंकि वहां तुवर एवं उड़द का उत्पादन मुख्यत: भारतीय बाजार पर ही निर्भर रहता है। 

सरकार ने 2025-26 सीजन के दौरान 36 लाख टन तुवर के घरेलू उत्पादन का अनुमान लगाया है जो 44-45 लाख टन की वार्षिक औसत खपत से काफी कम है। इसे देखते हुए आगामी समय में भी देश में तुवर के विशाल आयात की आवश्यकता बनी रहेगी।