नई सरसों की जोरदार आवक से कीमतों पर दबाव पड़ने की सम्भावना
03-Apr-2025 05:38 PM
नई दिल्ली। प्रमुख उत्पादक राज्यों की मंडियों में मार्च माह के दौरान करीब 14.50 लाख टन सरसों की विशाल आवक हुई और सरकारी क्रय केन्द्रों पर भी लगभग 50 हजार टन सरसों पहुंच गयी। सरकारी एजेंसी द्वारा 5950 रुपए प्रति क्विंटल के न्यूनतम समर्थन मूल्य पर सरसों की खरीद की गयी जबकि थोक मंडियों में इसका भाव ऊपर नीचे होता रहा। नीचे दाम पर सरसों की खरीद में व्यापारियों-स्टॉकिस्टों एवं मिलर्स-प्रोसेसर्स की अच्छी दिलचस्पी देखी जा रही है। समझा जाता है कि सरकारी एजेंसियों की जोरदार खरीद शुरू होने पर इस महत्वपूर्ण तिलहन की कीमतों में कुछ मजबूती आ सकती है।
केंद्र सरकार देश के शीर्ष उत्पादक प्रान्तों-राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हरियाणा एवं गुजरात आदि में सरसों की खरीद की अनुमति पहले ही दे चुकी है और इसकी मात्रा भी नियत कर दी गयी है। इन प्रान्तों में सरकारी क्रय केंद्र खोले गये हैं और चालू माह (अप्रैल) से वहां खरीद की प्रक्रिया जोर पकड़ने की सम्भावन है। किसानों को इसका बेसब्री से इन्तजार है।
केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने 2024-25 के वर्तमान रबी सीजन में सरसों का घरेलू उत्पादन घटकर 128.7 लाख टन तथा उद्योग-व्यापार संगठनों ने 111.25 लाख टन पर अटक जाने का अनुमान लगाया है। आमतौर पर मार्च से मई के तीन महीनों के दौरान सरसों की सर्वाधिक आपूर्ति होती है और इसके बाद आवक की रफ़्तार घटने लगती है। अप्रैल-मई में सरसों की खरीद के लिए स्र्कैर एजेंसियां भी सक्रिय रहती हैं। बेशक बिजाई क्षेत्र में गिरावट आने से सरसों का उत्पादन कुछ घटने की सम्भावना है लेकिन इसकी क्वालिटी बहुत अच्छी बताई जा रही है।
व्यापार विश्लेषकों के मुताबिक इस बार आरम्भ से ही सरसों का सूखा माल मंडियों में आ रहा है जिसमें नमी का अंश बहुत कम और तेल का अंश ज्यादा देखा जा रहा है। इसके फलस्वरूप खरदारों को इसकी खरीद करने में कोई हिचकिचाहट नहीं हो रही है। लेकिन किसानों को अपने उत्पाद का आकर्षक या लाभप्रद मूल्य हासिल करने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। प्रमुख उत्पादक राज्यों में सरसों फसल की कटाई के लिए मौसम अनुकूल बना हुआ है। राजस्थान में 51 लाख टन एवं उत्तर प्रदेश में 15 लाख टन सरसों के उत्पादन का अनुमान लगाया गया है।
