नई टैरिफ नीति से अमरीका में भारतीय काजू निर्यातकों को मिल सकता है फायदा

04-Apr-2025 12:33 PM

मंगलोर। ट्रम्प प्रशासन द्वारा भारतीय उत्पादों पर लगाए गए 26 प्रतिशत के आयात शुल्क के बावजूद अमरीका में भारतीय काजू का भाव ज्यादा प्रतिस्पर्धी स्तर पर रहने की उम्म्मीद है।

अल्पकालीन अवधि में  फायदा हो सकता है लेकिन दीर्घकालीन अवधि में भारतीय काजू निर्यातकों को अमरीकी बाजार में अमरीकी देशों की प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा क्योंकि अफ्रीकी काजू पर अमरीका में बहुत नीचे स्तर का सीमा शुल्क लागू है। 

ऑल इंडिया कैच्यू एसोसिएशन के अध्यक्ष फिलहाल अमरीकी काजू बाजार में भारत को वियतनाम की सख्त चुनौती का सामना करना पड़ता है लेकिन अब अमरीका ने वियतनामी काजू पर 46 प्रतिशत का भारी-भरकम आयात शुल्क लगा दिया है जबकि भारतीय काजू पर 26 प्रतिशत का ही सीमा शुल्क लगेगा।

इस तरह अमरीका में वियतनाम के मुकाबले भारत का काजू 20 प्रतिशत सस्ते दाम पर उपलब्ध हो सकता है। ध्यान देने की बात है कि अभी अमरीका अपनी घरेलू जरूरत के 90 प्रतिशत काजू का आयात वियतनाम से कर रहा है जिसके मुकाबले भारत से वहां बहुत कम काजू मंगाया जाता है। 

अमरीका में प्रति वर्ष औसतन 1.50 लाख टन काजू की खपत होती है जिसमें से करीब 1.30 लाख टन का आयात वियतनाम से किया जाता है। अमरीकी बाजारों में भारतीय काजू की भागीदारी महज 7000-8000 टन के करीब ही रहती है।

अल्पकालीन अवधि के लिए भारतीय के लिए यह सकारात्मक संकेत है क्योंकि वियतनामी काजू का निर्यात वहां प्रभावित हो सकता है। लेकिन आगामी वर्षों में जब अफ्रीकी देशों से निर्यात बढ़ेगा तब भारत को कठिनाई हो सकती है।

अफ्रीकी देशों से आयातित काजू पर अमरीका में 10 प्रतिशत का ही सीमा शुल्क लागू है जिससे उसके निर्यातकों को भारत की तुलना में  15-16 प्रतिशत कम शुल्क का लाभ मिल सकता है।

यदि अफ्रीकी देशों में काजू का उत्पादन बढ़ता है, प्रोसेसिंग क्षमता में वृद्धि होती है और वहां से अमरीकी बाजारों में काजू की आपूर्ति शुरू होती है तो अगले 2-3 वर्षों में भारत की कठिनाई बढ़ जाएगी। 

हाल के वर्षों में प्रसंस्कृत काजू के वैश्विक निर्यात बाजार में भारत को वियतनाम की कठिनाई कठिन प्रतिस्पर्धा एवं सख्त चुनौती का सामना करना पड़ा है

जिससे इसके निर्यात में भारी गिरावट आ गई है। लेकिन अमरीका में अब भारतीय काजू के निर्यात में अच्छी वृद्धि होने की उम्मीद है।