नियमित आयात एवं कमजोर मांग से तुवर की कीमतों पर दबाव बरकरार
12-Dec-2025 11:00 AM
कलबुर्गी। म्यांमार एवं अफ्रीकी देशों से सस्ते माल का आयात निरन्तर जारी रहने तथा घरेलू मांग एवं उठाव कमजोर होने से अरहर (तुवर) की कीमतों पर दबाव बना हुआ है जबकि कुछ क्षेत्रों में खरीफ सीजन की इस सबसे प्रमुख दलहन फसल के नए माल की आवक भी आरंभ हो गई है।
आगामी समय में इसकी आपूर्ति की रफ्तार क्रमिक रूप से बढ़ते जाने की संभावना है। इस बीच केन्द्र सरकार ने कर्नाटक में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर 9.67 लाख टन तुवर की खरीद के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान कर दी है।
महाराष्ट्र एवं कर्नाटक जैसे शीर्ष उत्पादक राज्यों की मंडियों में नई तुवर की आवक होने लगी है और इसका भाव 6700 से 7700 रुपए प्रति क्विंटल के बीच चल रहा है
जो 8000 रुपए प्रति क्विंटल के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से काफी नीचे है। जब तक सरकारी खरीद आरंभ नहीं होती तब तक किसानों को एमएसपी से नीचे दाम पर अपना स्टॉक बेचना पड़ेगा।
पिछले दिनों केन्द्रीय कृषि मंत्री ने खाद्य मंत्री को पत्र भेजकर सूचित किया था कि कर्नाटक में 9.67 लाख टन तुवर की सरकारी खरीद की अनुमति प्रदान की गई है और खरीद की अवधि 90 दिनों की होगी। राज्य सरकार को खरीद की तिथि निर्धारित करनी है।
एक अग्रणी एग्री कॉमोडिटी मार्केट रिसर्च फर्म- आईग्रेन इंडिया के डायरेक्टर राहुल चौहान का कहना है कि महाराष्ट्र और कर्नाटक की मंडियों में नई तुवर की आवक शुरू हो गई है और आगामी सप्ताहों के दौरान इसकी गति निरन्तर बढ़ती जाएगी गत वर्ष की तुलना में इस बार उत्पादन कुछ कम हो सकता है और बारिश के प्रकोप की वजह से दाने की क्वालिटी भी प्रभावित होने की आशंका है।
कीमतों में नरमी या स्थिरता का माहौल देखा जा रहा है। यदि सरकारी खरीद जल्दी आरंभ हो गई तो बाजार को कुछ समर्थन मिल सकता है और इससे उत्पादकों को थोड़ी राहत मिलेगी।
केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के प्रथम अग्रिम अनुमान के अनुसार 2025-26 के खरीफ सीजन में अरहर (तुवर) का घरेलू उत्पादन गिरकर 35.97 लाख टन पर अटक सकता है जो 2024-25 सीजन के उत्पादन 36.24 लाख टन से 27 हजार टन कम है। लातूर के एक विश्लेषक का कहना है कि मार्केट में तुवर की मांग कमजोर बनी हुई है
लेकिन दक्षिण भारत में पोंगल त्यौहार का सीजन शुरू होने से पूर्व 20-25 दिसम्बर के आसपास इसमें थोड़ी बहुत मांग निकलने की उम्मीद की जा रही है।
महाराष्ट्र के विदर्भ एवं मराठवाड़ा संभाग तथा कर्नाटक के कुछ हिस्सों में तुवर फसल की हालत काफी अच्छी है और विदेशों से तुवर का आयात भी जारी है।
