रूई का निर्यात घटकर 18 लाख गांठ पर सिमटने का अनुमान

19-Dec-2024 12:31 PM

अहमदाबाद । एक अग्रणी व्यापारिक संस्था- कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीएआई) ने देश से रूई का कुल निर्यात 2023-24 सीजन के 28.36 लाख गांठ से 36.53 प्रतिशत घटकर 2024-25 के वर्तमान मार्केटिंग सीजन (अक्टूबर-सितम्बर) में 18 लाख गांठ पर अटक जाने का अनुमान लगाया है। मालूम हो कि रूई की प्रत्येक गांठ 170 किलो की होती है।

एसोसिएशन की नई रिपोर्ट के अनुसार कपास के बिजाई क्षेत्र में भारी गिरावट आने तथा कुछ क्षेत्रों में फसल को प्राकृतिक आपदाओं एवं कीड़ों-रोगों के प्रकोप से नुकसान होने के कारण रूई का उत्पादन काफी घटने की संभावना है। इससे निर्यात उद्देश्य के लिए रूई का सीमित स्टॉक उपलब्ध हो सकेगा।

एसोसिएशन के अनुसार पिछले साल की तुलना में चालू वर्ष के दौरान कपास का रकबा उत्तरी क्षेत्र (पंजाब, हरियाणा एवं राजस्थान) में करीब 35 प्रतिशत तथा गुजरात में 15 प्रतिशत घट गया।

देश के अन्य प्रांतों में भी क्षेत्रफल कुछ कम रहा। इसके फलस्वरूप रूई के उत्पादन में भारी गिरावट आने के संकेत मिल रहे हैं। रूई का घरेलू बाजार भाव वैश्विक बाजार मूल्य की तुलना में स्थिर देखा आज रहा है।

एसोसिएशन की रिपोर्ट के मुताबिक 2023-24 के मार्केटिंग सीजन के दौरान कपास की कुल प्रेसिंग घटकर 302.25 लाख गांठ रह गई जबकि 2022-23 के सीजन में इसकी मात्रा 327.45 लाख गांठ दर्ज की गई थी।

नवम्बर 2024 के अंत तक घरेलू मंडियों में कुल 108.41 लाख गांठ कपास की आपूर्ति हुई जिसमें 69.22 लाख गांठ का नया माल, 9 लाख गांठ का आयात तथा 30.19 लाख गांठ का पिछला बकाया स्टॉक शामिल था।

इसमें से 54 लाख गांठ का घरेलू उपयोग एवं 4 लाख गांठ का निर्यात किया गया। इसके बाद नवम्बर के अंत में 50.41 लाख गांठ रूई का अधिशेष स्टॉक बच गया। कपास की आवक नियमित रूप से जारी है।