रूस के साथ व्यापार संतुलन में कृषि इंजीनियरिंग एवं फार्मा उत्पाद बनेंगे सहायक
04-Dec-2025 06:09 PM
नई दिल्ली। रूस के राष्ट्रपति वलादिमीर पुतिन एक विशाल प्रतिनिधिमंडल के साथ आज यानी 4 दिसम्बर 2025 को भारत के दो दिवसीय दौरे पर आ रहे हैं।
इस दौरे के क्रम में दोनों देशों के बीच रक्षा क्षेत्र सहित कई अन्य क्षेत्रों में द्विपक्षीय करार होने की संभावना है। इससे भारत को रूस के साथ व्यापार संतुलन में काफी हद तक सहायता मिल सकती है।
दरअसल भारत में रूस से कच्चे तेल (पेट्रोलियम) का विशाल आयात होता है और इस पर भारी-भरकम बहुमूल्य विदेशी मुद्रा खर्च हो रही है। इससे व्यापार संतुलन प्राय: रूस के पक्ष में झुका रहता है।
भारत से रूस को सीमित मात्रा में वाणिज्यिक वस्तुओं और कृषि उत्पादों का निर्यात किया जाता है। लेकिन अब भारत की क्षमता काफी बढ़ गई है और वह उन क्षेत्रों के उत्पादों का निर्यात बढ़ाने में सक्षम हो गया है जिसमें इसके उत्पादों का दाम अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी रहता है।
भारत और रूस का शीर्ष नेतृत्व भी ज्यादा से ज्यादा व्यापार संतुलन के पक्ष में हैं। भारत सरकार ने कुछ ऐसे क्षेत्रों की पहचान की है जिसके उत्पादों का निर्यात रूस में बढ़ाने की बेहतर गुंजाईश है।
इसमें इंजीनियरिंग के सामान, फार्मास्युटिकल (दवाइयों-औषधियों) के सामान रसायन तथा कृषि उत्पाद आदि शामिल है। कृषि उत्पादों के संवर्ग में रूस को भारत से बासमती एवं गैर बासमती चावल तथा मूंगफली आदि का निर्यात बढ़ाया जा सकता है।
भारत की वैश्विक निर्यात शक्ति और रूस की मांग के दायरे में यदि संतुलन बनाने पर दोनों देश राजी होते हैं तो दोनों को ही भारी फायदा हो सकता है रूस में अनेक उत्पादों का उत्पादन नहीं या नगण्य होता है जिसकी आपूर्ति भारत आसानी से कर सकता है।
पिछले वित्त वर्ष के दौरान भारत और रूस के बीच कुल 68.70 अरब डॉलर का कारोबार हुआ जिसमें रूस को भारत से निर्यात की भागीदारी महज 4.8 अरब डॉलर की रही जबकि भारत में रूस से आयात की हिस्सेदारी बढ़कर 63.8 अरब डॉलर पर पहुंच गई।
इस तरह 59 अरब डॉलर के विशाल अंतर के साथ द्विपक्षीय व्यापार संतुलन रूस के पक्ष में झुका हुआ है। इस विशाल अंतर को पाटना आसान नहीं होगा लेकिन भारत से निर्यात बढ़ाकर इस अंतर को घटाना संभव हो सकता है।
