रूस में भारतीय कृषि उत्पादों का निर्यात बढ़ने के आसार
05-Dec-2025 08:56 PM
नई दिल्ली। रूस के राष्ट्रपति वलादिमीर पुतिन के दो दिवसीय भारत दौरे से द्विपक्षीय व्यापार के लिए कई नए दरवाजे खुलने की उम्मीद है। इसमें कृषि इंजीनियरिंग एवं फार्मा उद्योग के उत्पाद एवं सामान भी शामिल हैं।
भारत में अनेक कृषि उत्पादों का अधिशेष उत्पादन होता है जिसका रूस में अभाव रहता है और वह दूसरे देशों से इसका आयात करता है दोनों देशों के बीच आज यानी 5 दिसम्बर को अनेक करार पर हस्ताक्षर हुए हैं जिससे रूस में भारतीय उत्पादों का निर्यात बढ़ने के आसार हैं।
रूस का कृषि बाजार अत्यन्त विशाल है। वह स्वयं गेहूं का सबसे प्रमुख निर्यातक और तीसरा सबसे बढ़ा उत्पादक देश है।
इसके अलावा वहां से मक्का, जौ, जई, मटर, मसूर, काबुली चना, सूरजमुखी तेल एवं रेपसीड तेल का भी भारी निर्यात होता है इसलिए इन कृषि उत्पादों का भारत से वहां निर्यात होना मुश्किल है। वैसे भी भारत इन उत्पादों का महत्वपूर्ण निर्यातक देश नहीं है और रूस का उत्पाद काफी सस्ते दाम वाला होता है।
लेकिन रूस में चावल, मूंगफली एवं चीनी का उत्पादन कम होता है और वह भारत से इसका आयात बढ़ा सकता है। इसी तरह वहां डेयरी उत्पादों एवं समुद्री खाद्य उत्पादों की कमी रहती है जिसे भारत पूरी कर सकता है। भारत से रूस में मसालों एवं मसाला उत्पादों तथा कुछ सूखे मेवों- खासकर काजू का निर्यात बढ़ सकता है।
रूस पहले हल्की क्वालिटी के कारण भारतीय उत्पादों की खरीद में ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाता था लेकिन अब उसके नजरिये में काफी बदलाव आ गया है क्योंकि एक तो भारतीय उत्पादों की क्वालिटी अब विश्वस्तरीय हो गई है और दूसरे, दोनों देशों के बीच आपसी सम्बन्ध भी काफी सुदृढ़ हो गए हैं।
रूस और भारत के बीच होने वाले द्विपक्षीय कारोबार के अंतर्गत व्यापार संतुलन पूरी तरह रूस के पक्ष में झुका हुआ है जिसे कम करने की आवश्यकता महसूस की जा रही है। दिलचस्प तथ्य यह है कि सिर्फ क्रूड खनिज तेल की वजह से भारत का व्यापार घाटा बढ़ा है। यदि इसे अलग रख दिया जाए तो भारत और रूस के बीच अभी द्विपक्षीय व्यापार बहुत कम हो रहा है।
