ऑस्ट्रेलिया में दलहनों के उत्पादन अनुमान में भारी बदलाव
03-Dec-2024 01:45 PM
कैनबरा । ऑस्ट्रेलिया की सरकारी एजेंसी- अबारेस ने सितम्बर 2024 की तुलना में दिसम्बर 2024 की अपनी तिमाही रिपोर्ट में दलहन फसलों के घरेलू उत्पादन अनुमान में भारी बदलाव कर दिया है।
इसके तहत एक ओर जहां चना का उत्पादन अनुमान 13 लाख टन से बढ़ाकर 19 लाख टन नियत किया गया है वहीं दूसरी तरफ मसूर का उत्पादन अनुमान 17 लाख टन से घटाकर 11 लाख टन निर्धारित किया गया है।
ऑस्ट्रेलिया इन दोनों दलहन फसलों का एक अग्रणी उत्पादक एवं निर्यातक देश है। वह चना के निर्यात में पहले तथा मसूर के निर्यात में दूसरे नम्बर पर रहता है। ऑस्ट्रेलिया में दलहन फसलों की कटाई-तैयारी पहले ही आरंभ हो चुकी है और अब अंतिम चरण में पहुंच गई है।
सितम्बर की तुलना में दिसम्बर की रिपोर्ट में चना के उत्पादन अनुमान में 42 प्रतिशत की जोरदार बढ़ोत्तरी की गई है क्योंकि एक तो इसके बिजाई क्षेत्र में इजाफा हुआ और दूसरे, मौसम की अनुकूल स्थिति के सहारे इसकी औसत उपज दर में भी काफी सुधार आ गया।
समीक्षकों के अनुसार चना के दाने की क्वालिटी काफी अच्छी देखी जा रही है जिससे इसके निर्यात में कोई समस्या उत्पन्न नहीं होगी।
न्यू साउथ वेल्स तथा क्वींसलैंड प्रान्त में फसल की शानदार स्थिति को देखते हुए चना के उत्पादन अनुमान में भारी बढ़ोत्तरी की गई है।
दूसरी ओर विक्टोरिया एवं साउथ ऑस्ट्रेलिया प्रान्त में मौसम अत्यन्त प्रतिकूल होने की वजह से मसूर की फसल को भारी नुकसान हुआ है इसलिए अबारेस को इसके उत्पादन अनुमान में 34 प्रतिशत की कटौती करनी पड़ी।
जहां तक फाबा बीन्स का सवाल है तो अबारेस ने तीनों पूर्वी प्रांतों में इसके उत्पादन अनुमान में बढ़ोतरी की है मगर साउथ ऑस्ट्रेलिया में उत्पादन का अनुमान 42 प्रतिशत घटा दिया है।
एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार न्यू साउथ वेल्स प्रान्त में फाबा बीन्स का उत्पादन उछलकर 3.50 लाख टन के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच जाने का अनुमान है जो 2023-24 सीजन के शीर्ष उत्पादन 1.65 लाख टन की तुलना में दोगुने से भी ज्यादा है।
न्यू साउथ वेल्स प्रान्त में चना का उत्पादन भी पहली बार 10 लाख टन की सीमा को पार करके 11 लाख टन के सर्वकालीन सर्वोच्च स्तर पर पहुंचने की संभावना व्यक्त की गई है जो इससे पूर्व 2016-17 सीजन के रिकॉर्ड उत्पादन 7.92 लाख टन से भी काफी अधिक है।
क्वींसलैंड प्रान्त में चना फसल की कटाई लगभग समाप्त हो चुकी है। वहां उत्पादन बढ़कर 7.50 लाख टन पर पहुंचने का अनुमान है जो 2016-17 के रिकॉर्ड उत्पादन 11.50 लाख टन के बाद दूसरा सबसे बड़ा उत्पादन माना जा रहा है।
