पंजाब में धान से चावल की रिकवरी दर घटने से राइस मिलर्स परेशान
04-Dec-2025 04:21 PM
चंडीगढ़। केन्द्रीय पूल में खाद्यान्न का सर्वाधिक योगदान देने वाले राज्य- पंजाब के राइस मिलर्स फिलहाल काफी चिंतित और परेशान हैं क्योंकि इस बार धान से चावल की औसत रिकवरी दर कम देखी जा रही है और उसमें टूट का अंश भी ज्यादा है।
हालांकि प्राकृतिक आपदाओं के प्रकोप से धान की फसल को हुए नुकसान के कारण सरकार ने क्षतिग्रस्त एवं बदरंग दाने की सीमा को 10 प्रतिशत तक बढ़ा दिया है लेकिन धान से चावल की औसत रिकवरी दर को 60-61 प्रतिशत ने पिछले स्तर पर ही बरकार रखा है।
पंजाब के राइस मिलर्स के लिए मौजूदा खरीफ मार्केटिंग सीजन काफी चुनौतीपूर्ण है। पहले इसकी मान्य या स्वीकृत सीमा 5 प्रतिशत थी जिसे अब 10 प्रतिशत नियत कर दी गई है।
इससे किसानों को तो राहत मिल गई- लेकिन मिलर्स की मुसीबत बढ़ गई। पंजाब में धान की सरकारी खरीद समाप्त हो चुकी है।
राइस मिलर्स को कस्टम मिलिंग के लिए सरकारी धान का कोटा भी आवंटित किया जा रहा है लेकिन धान की मिलिंग से इतना चावल प्राप्त नहीं हो रहा है जितना सरकार ने नियत कर रखा है। सरकार को मिलर्स से 67 प्रतिशत साबुत चावल चाहिए।
राइस मिलर्स का कहना है कि सरकार को व्यापारिक दृष्टिकोण के साथ इस बार चावल की रिकवरी दर का निर्धारण करना चाहिए।
पंजाब के राइस मिलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष का कहना है कि चावल मिलर्स शांति के साथ धान के आवंटित कोटे को स्वीकार कर रहे हैं क्योंकि इस बार राज्य में केवल 156 लाख टन धान की सरकारी खरीद हुई है
जो 180 लाख टन के नियत लक्ष्य से काफी कम है। मिलर्स खुले रूप में कुछ नहीं बोल रहे हैं लेकिन हकीकत यही है कि इस बार चावल की रिकवरी दर कम है और टूट का अंश ज्यादा देखा जा रहा है।
