पंजाब और राजस्थान के सीमावर्ती जिलों में खरीफ फसलों की खेती की तैयारी शुरू

12-May-2025 10:57 AM

नई दिल्ली। पाकिस्तान की सीमा से सटे भारत के दो महत्वपूर्ण कृषि उत्पादक प्रान्त- पंजाब और राजस्थान के 10 सीमावर्ती जिलों में किसानों ने खरीफ फसलों की खेती के लिए जोरदार तैयारी शुरू कर दी है। पाकिस्तान के साथ औपचारिक तौर पर युद्ध विराम की घोषणा हो चुकी है इसलिए किसान निश्चिंत होकर अपनी गतिविधियां आरम्भ कर सकते हैं।

उल्लेखनीय है कि खरीफ सीजन के दौरान पंजाब में धान (बासमती एवं गैर बासमती) तथा राजस्थान में मूंग एवं बाजरा की खेती बड़े पैमाने पर होती है जबकि कई अन्य फसलों की भी बिजाई होती है। पंजाब केन्द्रीय पूल में खाद्यान्न का सर्वाधिक योगदान देने वाला राज्य है। 

ध्यान देने की बात है कि पंजाब और राजस्थान के इन 10 सीमावर्ती जिलों में करीब 30 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की खेती होती है और लगभग 43 लाख टन खाद्यान्न का उत्पादन होता है।

इस क्षेत्र के किसान भारत-पाकिस्तान विवाद से बिल्कुल चिंतित नहीं है क्योंकि उन्हें भारतीय सेना के शौर्य  और पराक्रम पर पूरा भरोसा है। अब वैसे भी हालात सामान्य होने जा रहे हैं और इस बार मानसून की बारिश भी अच्छी होने की संभावना है जिससे किसान काफी उत्साहित हैं।

जिन 10 जिलों में खरीफ फसलों की खेती की तैयारी चल रही है उसमें पंजाब के तरन तारन, अमृतसर, फिरोजपुर, पठानकोट, गुरदासपुर फाजिल्का एवं राजस्थान के जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर तथा श्रीगंगा नगर शामिल हैं।

इसके अलावा अनूपगढ़ सहित कुछ अन्य जिलों में भी किसानों की सक्रियता बढ़ने लगी है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 2023 -24 सीजन के दौरान पंजाब के सीमावर्ती जिलों में 8.77 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की खेती हुई थी और 34.03 लाख टन खाद्यान्न का उत्पादन हुआ था जबकि राजस्थान के सीमावर्ती जिलों में 20.83 लाख हेक्टेयर में हुई खेती से 8.84 लाख टन का उत्पादन प्राप्त हुआ था।

पंजाब में धान तथा राजस्थान में मूंग एवं बाजरा की खेती होती है जबकि पंजाब के इन सीमावर्ती जिलों में 98 प्रतिशत से अधिक क्षेत्रफल धान का रहता है। 

केन्द्रीय कृषि मंत्रालय देश के चार सीमवर्ती राज्यों- पंजाब, राजस्थान, गुजरात एवं जम्मू कश्मीर में खेती की स्थिति की समीक्षा कर रहा है और वहां तमाम सुविधाएं उपलब्ध करवाने का प्रयास किया जा रहा है।

इसमें खाद और बीज भी शामिल है। सरकार पहले ही कह चुकी है कि सिंधु एवं उसकी सहायक नदियों का जो पानी पाकिस्तान को दिया जाता था वह अब राजस्थान, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और दिल्ली को दिया जाएगा।

इससे वहां पानी के अभाव का संकट दूर होगा। कृषि मंत्रालय इन सभी जिलों में किसानों को हर संभव सहायता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।