पाम तेल में तेजी की संभावना से सोया तेल का दीर्घकालीन आयात अनुबंध
01-Dec-2025 08:59 PM
मुम्बई। सोयाबीन तेल के प्रतिद्वंदी- पाम तेल का भाव अगले साल काफी बढ़ने की संभावना को देखते हुए भारतीय रिफाइनर्स ने आसान सा कदम उठाया है। आमतौर पर रिफानर्स अगले दो या तीन महीनों तक के शिपमेंट के लिए खाद्य तेलों (पाम तेल सोयाबीन तेल एवं सूरजमुखी तेल) के आयात का अनुबंध करते हैं
लेकिन इस बार भारतीय रिफाइनर्स ने अगले वित्त वर्ष के शुरुआती चार महीनों के शिपमेंट के लिए सोयाबीन तेल की खरीद का सौदा कर लिया है जो एक असाधारण घटना मानी जा रही है।
एक अग्रणी उद्योग विश्लेषक के अनुसार भारतीय रिफाइनर्स द्वारा लैटिन अमरीकी देशों से अप्रैल-जुलाई 2026 के प्रत्येक माह के लिए 1.50 लाख टन अधिक सोयाबीन तेल के आयात का अनुबंध किया गया है।
समीक्षकों के अनुसार इस दीर्घकालीन असामन्य आयात अनुबंध का प्रमुख कारण यह है कि सोया तेल के भाव इस अवधि के लिए पाम तेल के निर्यात ऑफर मूल्य की तुलना में औसतन 20-50 डॉलर प्रति टन नीचे चल रहा है। उल्लेखनीय है कि सामान्य तौर पर सोया तेल का निर्यात ऑफर मूल्य पाम तेल से ऊंचा रहता है।
दरअसल भारतीय रिफाइनर्स को आशंका है कि दुनिया के सबसे प्रमुख पाम तेल उत्पादक एवं निर्यातक देश- इंडोनेशियन ने बायोडीजल में 50 प्रतिशत पाम तेल के अनिवार्य उपयोग का जो प्लान बनाया है उसे वर्ष 2026 में लागू किया जा सकता है।
इससे वहां पाम तेल की घरेलू खपत काफी बढ़ जाएगी और निर्यात के लिए कम स्टॉक बचेगा। इसके फलस्वरूप पाम तेल का वैश्विक बाजार भाव ऊंचा एवं तेज रह सकता है सोयाबीन,
सूरजमुखी का रेपसीड- कैनोला के विपरीत ऑयल पाम का उत्पादन पूरे वर्ष चलता रहता है। सनासर में खाद्य तेलों के संवर्ग में सर्वाधिक उपलब्धता पाम तेल की ही रहती है जिससे यह अन्य खाद्य तेलों की तुलना में सस्ता रहता है।
उद्योग समीक्षकों के अनुसार अप्रैल-जुलाई 2026 के शिपमेंट के लिए 6.50 लाख टन से अधिक सोयाबीन तेल की विशाल मात्रा का अनुबंध पहले ही कर लिया गया है
जबकि आगामी महीनों में और भी सौदे होते रहेंगे। इसके फलस्वरूप 2025-26 के वर्तमान मार्केटिंग सीजन (नवम्बर-अक्टूबर) के दौरान एक बार फिर सोया तेल का रिकॉर्ड आयात हो सकता है।
