पश्चिमोत्तर राज्यों में अनुकूल मौसम के साथ गेहूं की कटाई का अभियान शुरू
01-Apr-2025 04:27 PM
नई दिल्ली। पश्चिमी विक्षोभ एवं साइक्लोनिक सर्कुलेशन के प्रभाव से देश के पश्चिमोत्तर भाग में पिछले कुछ दिनों से मौसम काफी हद तक सुहावना हो गया है और तापमान भी लगभग सामान्य स्तर के आसपास ही चल रहा है।
इससे गेहूं सहित अन्य रबी फसलों को राहत मिल रही है। हवा में गर्मी कम और ठंडक ज्यादा है। पहले ऊंचे तापमान से फसलों को नुकसान होने की आशंका व्यक्त की जा रही थी।
हालांकि उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान एवं गुजरात जैसे राज्यों में गेहूं फसल की कटाई तैयारी मध्य मार्च से ही आरंभ हो गई थी मगर इसका दायरा सीमित था।
अब 1 अप्रैल 2025 से इन राज्यों के साथ-साथ पंजाब, हरियाणा, बिहार, महाराष्ट्र, हिमाचल प्रदेश एवं उत्तराखंड सहित अन्य उत्पादक प्रांतों में भी गेहूं फसल की कटाई-तैयारी का सीजन औपचारिक तौर पर आरंभ हो गया है।
लगभग सभी प्रमुख उत्पादक राज्यों में गेहूं फसल की हालत सामान्य या संतोषजनक बताई जा रही है इसलिए उपज दर या पैदावार में गिरावट आने की संभावना है। वैसे इसका सही सही अनुमान तो फसल कटाई के बाद ही लगाया जा सकेगा।
सरकार ने इस वर्ष गेहूं का घरेलू उत्पादन उछलकर 1154.30 लाख टन के सर्वकालीन सर्वोच्च स्तर पर पहुंच जाने का अनुमान लगाया है जो पिछले साल के रिकॉर्ड उत्पादन 1132.90 लाख टन से करीब 21.40 लाख टन ज्यादा है। लेकिन गेहूं की खरीद का लक्ष्य घटाकर 310 लाख टन निर्धारित किया है।
नए माल की आवक शुरू होने तथा विशाल उत्पादन का अनुमान लगाए जाने से प्रमुख मंडियों में गेहूं की कीमतों पर भारी दबाव पड़ने लगा है और कुछ मंडियों में तो दाम घटकर 2425 रुपए प्रति क्विंटल के न्यूनतम समर्थन मूल्य से भी नीचे आ गया है।
मध्य प्रदेश एवं राजस्थान में किसानों के न्यूनतम समर्थन मूल्य से ऊपर क्रमश: 175 रुपए तथा 150 रुपए प्रति क्विंटल का बोनस भी दिया जाएगा।
