रबी फसलों की बेहतर बिजाई
13-Dec-2025 01:20 PM
दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान तथा उसके बाद भी अक्टूबर-नवम्बर में अच्छी बारिश होने से खेतों की मिटटी में नमी का पर्याप्त अंश मौजूद रहने से इस वर्ष भारतीय किसानों को रबी फसलों की बिजाई करने में अच्छी सहायता मिल रही है जिससे इसके उत्पादन क्षेत्र में बढ़ोत्तरी का सिलसिला निरन्तर जारी है।
वैसे किसानों का रुझान कुछ खास फसलों की तरफ ज्यादा देखा जा रहा है जिसमें गेहूं, जौ, सरसों एवं चना मुख्य रूप से शामिल है। धान का रकबा भी गत वर्ष से आगे चल रहा है मगर मसूर, मटर, कुलथी, खेसारी एवं ज्वार तथा कुछ तिलहनों की बिजाई में कमी आने के संकेत मिल रहे हैं।
पिछले सप्ताह तक राष्ट्रीय स्तर पर रबी फसलों का कुल उत्पादन क्षेत्र बढ़कर 479 लाख हेक्टेयर से ऊपर पहुंच गया था जो गत वर्ष की समान अवधि के बिजाई क्षेत्र 451.12 लाख हेक्टेयर से करीब 27.90 लाख हेक्टेयर ज्यादा था। हालांकि दलहनों का कुल बिजाई क्षेत्र पिछले साल के 105.78 लाख हेक्टेयर से सुधरकर इस बार 106.21 लाख हेक्टेयर हो गया मगर इसमें मुख्यतः चना तथा उड़द के क्षेत्रफल में हुई वृद्धि का योगदान रहा
क्योंकि दूसरी ओर अन्य दलहनों के रकबे में कमी आ गई। मोटे अनाजों एवं तिलहनों का उत्पादन क्षेत्र भी बढ़कर क्रमश: 36.28 लाख हेक्टेयर एवं 84 लाख हेक्टेयर पर पहुंचा मगर इसमें खास-खास फसलों का विशेष योगदान देखा गया। जहां तक गेहूं का सवाल है तो इसके उत्पादन क्षेत्र में सबसे ज्यादा तेज गति से बढ़ोत्तरी देखी जा रही है।
ऐसा प्रतीत होता है कि इस बार गेहूं का बिजाई क्षेत्र बढ़कर एक नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच जाएगा। अब चालू सप्ताह के रकबे का इंतजार किया जा रहा है। रबी फसलों की बिजाई आगे भी जारी रहेगी।
हालांकि देश के अधिकांश इलाकों में पिछले एक-डेढ़ महीने से अच्छी वर्षा नहीं हुई है जबकि कई राज्यों में दिन का औसत तापमान 25 डिग्री सेल्सियस से करीब चल रहा है जिससे कुछ इलाकों में खेतों की मिटटी में नमी की मौजूदगी घटने वाली है लेकिन फिलहाल फसलों को कोई ज्यादा खतरा नहीं है।
भू जल तथा भूमिगत जल का स्तर सामान्य है तथा बांधों-जलाशयों एवं अन्य जल स्रोतों में पानी का समुचित भंडार उपलब्ध है। इससे फसलों की अच्छी सिंचाई सुनिश्चित हो सकेगी।
बिजाई क्षेत्र में कमी के कारण कुछ फसलों का उत्पादन घट सकता है। वैसे जनवरी-फरवरी का मौसम रबी फसलों के लिए अत्यन्त महत्वपूर्ण होता है इसलिए उस पर विशेष ध्यान रखना आवश्यक है।
