राजस्थान में सरकारी खरीद के लिए गेहूं की गुणवत्ता शर्तों में ढील

21-Mar-2025 11:19 AM

नई दिल्ली । राज्य सरकार के विशेष अनुरोध पर केन्द्रीय खाद्य मंत्रालय ने राजस्थान में सरकारी खरीद के लिए कुछ शर्तों के साथ गेहूं की गुणवत्ता से सम्बन्धित नियमों- शर्तों एवं विनिर्दिष्टताओं में कुछ राहत-रियायत देने की घोषणा की है।

केन्द्रीय खाद्य, उपभोक्ता मामले एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय द्वारा जारी एक सर्कुलर के अनुसार राजस्थान के सभी जिलों में शुरुआती गर्मी / वर्षा से गेहूं की फसल प्रभावित हुई जिससे दाने की क्वालिटी में खराबी आने की आशंका है।

ऐसी हालत में किसानों की कठिनाई को घटाने के उद्देश्य से 2025-26 के वर्तमान रबी मार्केटिंग सीजन में गेहूं की समान (यूनिफार्म) विनिर्दिष्टता में राहत देने का निर्णय लिया गया है जो राज्य के सभी उत्पादक जिलों के लिए मान्य होगा। 

इसके तहत गेहूं के स्टॉक में चिपटे या टूटे दाने के अंश की सीमा 6 प्रतिशत के मौजूदा स्तर से बढ़ाकर 20 प्रतिशत निर्धारित की गई है।

इसी तरह स्टॉक में क्षतिग्रस्त तथा आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त- दोनों का अंश संयुक्त रूप से 6 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए।

गेहूं में चमकहीन (लस्टर लॉस) दाने का अंश 10 प्रतिशत तक हो सकता है। रियायती नियमों के तहत खरीदे जाने वाले गेहूं के स्टॉक को सामान्य गेहूं के भंडार से अलग रखा जाना चाहिए।

राहत पूर्ण नियमों के अंतर्गत खरीदे गए गेहूं की क्वालिटी में यदि भंडारण के दौरान कोई खराबी या कमी आती है तो उसकी पूरी और एक मात्र जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी।

इसी तरह नियमों- शर्तों में दी गई छूट के तहत खरीदे गए गेहूं का निष्कासन प्राथमिकता के आधार पर सामान्य क्वालिटी के गेहूं से पहले करना जरुरी होगा।

इतना ही नहीं बल्कि इस रियायती विनिर्देश वाले गेहूं का उपयोग राजस्थान के अंदर ही किया जाएगा और इसे राज्य से बाहर नहीं भेजा जाएगा।

इस राहत-रियायत के कारण यदि कोई वित्तीय नुकसान या संचालनीय खर्च होता है तो उसे राज्य सरकार को वहन करना पड़ेगा। 

राजस्थान के कई जिलों में इस बार मौसम की हालत गेहूं की फसल के लिए पूरी तरह अनुकूल नहीं रही जिससे वहां इसके दाने की क्वालिटी प्रभावित हुई है।

इसे देखते हुए खाद्य मंत्रालय ने यहां गेहूं की खरीद के लिए गुणवत्ता सम्बन्धी नियमों- शर्तों  में छूट देने का फैसला किया है।