राज्यों को दलहनों एवं तिलहनों की खेती पर विशेष ध्यान देने का सुझाव

04-Jun-2026 07:46 PM

नई दिल्ली। खरीफ फसलों की बिजाई का सीजन औपचारिक तौर पर 1 जून 2026 से आरंभ हो चुका है और इस बार अल नीनो के कारण मानसून के कमजोर रहने की संभावना को देखते हुए केन्द्र सरकार ने राज्यों से दलहनों एवं तिलहनों की खेती पर विशेष ध्यान देने के लिए कहा है। दरअसल मानसून सीजन में बारिश सामान्य औसत से कम होने का अनुमान है जबकि इस बार उर्वरकों की आपूर्ति में भी बाधा पड़ सकती है इसलिए राज्यों को दलहन-तिलहन फसलों की खेती को प्राथमिकता देने के लिए कहा जा रहा है। 

केन्द्र सरकार ने राज्यों से उचित समय पर बीजों का उठाव करने तथा किसानों के बीच उसका वितरण सुनिश्चित करने के लिए कहा है। इसके अलावा दलहन-तिलहन संवर्ग की फसलों की औसत उपज दर बढ़ाने के लिए भी आवश्यक एहतियाती प्रयास करने के लिए कहा गया है ताकि स्वदेशी स्रोतों से इसकी आपूर्ति एवं उपलब्धता बढ़ाने तथा दलहनों एवं खाद्य तेलों के आयात पर निर्भरता घटाने में सहायता मिल सके। 

उल्लेखनीय है कि खरीफ सीजन के दौरान दलहनों के संवर्ग में मुख्यतः अरहर (तुवर), उड़द, मूंग, मोठ, कुलथी एवं खेसारी आदि का उत्पादन होता है और इसके प्रमुख उत्पादक राज्यों में राजस्थान, महाराष्ट्र, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, गुजरात, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना एवं आंध्र प्रदेश आदि शामिल है।

इसी तरह खरीफ कालीन प्रमुख तिलहनों-सोयाबीन, मूंगफली, अरंडी, तिल एवं सूरजमुखी आदि के उत्पादन में मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, कर्नाटक एवं तेलंगाना आदि राज्य अग्रणी हैं। 

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार कुछ इलाकों में इस बार दलहनों की खेती को विशेष वरीयता दी जा सकती है क्योंकि इसकी फसल को सिंचाई के लिए पानी की कम जरूरत पड़ती है। लेकिन तिलहन फसलों में सोयाबीन पर विशेष नजर रखनी होगी।

वैसे हाल के महीनों में इसके थोक मंडी मूल्य में जबरदस्त इजाफा हुआ है जिससे किसान काफी उत्साहित हैं और इसलिए वे इसका रकबा बढ़ाने का प्रयास कर सकते हैं। मूंगफली के बिजाई क्षेत्र में भी कुछ वृद्धि हो सकती है क्योंकि इसका भाव ऊंचा चल रहा है।