राज्यों से किसानों को धान और गेहूं पर बोनस नहीं देने का आग्रह
15-Apr-2026 04:20 PM
नई दिल्ली। केन्द्र सरकार ने राज्यों से कहा है कि धान और गेहूं पर किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से ऊपर अतिरिक्त बोनस नहीं देने पर गंभीरतापूर्वक विचार किया जाए क्योंकि इससे देश में इसका अधिशेष उत्पादन होता है, केन्द्रीय पूल के लिए इसकी विशाल खरीद करनी पड़ती है और किसान दलहन-तिलहन फसलों का उत्पादन बढ़ाने पर समुचित ध्यान नहीं देते हैं।
उल्लेखनीय है कि उड़ीसा, छत्तीसगढ़, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, झारखंड, राजस्थान एवं मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में या तो धान या गेहूं अथवा दोनों पर अतिरिक्त बोनस दिया जा रहा है।
केन्द्रीय वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग ने राज्यों को पत्र भेजकर बोनस की प्रथा को बंद करने के लिए कहा है। इस पत्र पर बवाल मचने के बाद वित्त मंत्रालय ने स्पष्टीकरण दिया है कि व्यय विभाग का यह पत्र कोई बाध्यकारी दिशा निर्देश नहीं बल्कि एक ऐच्छिक सुझाव है।
व्यय विभाग के पत्र में कहा गया है कि केन्द्रीय पूल में फिलहाल खाद्यान्न का कुल भंडार न्यूतनम आवश्यक बफर स्टॉक से तीन गुणा ज्यादा है। इससे केन्द्र पर वित्तीय एवं भंडारण का दबाव काफी बढ़ गया है। गेहूं और धान (रबी कालीन) की खरीद की जाती है जिससे आगामी दिनों में संकट और भी गंभीर हो सकता है।
दरअसल केन्द्र सरकार गेहूं और धान की पैदावार को स्थिरता या सीमित रखते हुए दलहन, तिलहन एवं मोटे अनाजों का घरेलू उत्पादन बढ़ाने को प्राथमिकता देना चाहती है ताकि खाद्य तेलों एवं दलहनों के विशाल आयात पर निर्भरता घटाने में सहायता मिल सके।
केन्द्रीय व्यय सचिव द्वारा तमिलनाडु के मुख्य सचिव को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि धान और गेहूं का बम्पर उत्पादन होने से इसका सरकारी स्टॉक बहुत बढ़ गया है। इससे अनेक तरह की समस्या पैदा होने वाली है। बोनस से किसानों को प्रोत्साहन मिलता है।
