रुपए की कमजोरी से भारत को चीनी का निर्यात अनुबंध करने में सफलता
04-Dec-2025 04:18 PM
मुम्बई। केन्द्र सरकार द्वारा स्वदेशी उद्योग को 2025-26 के वर्तमान मार्केटिंग सीजन के लिए 14 नवम्बर को 15 लाख टन चीनी के निर्यात की अनुमति दिए जाने के बाद भारतीय निर्यातकों ने इसका फायदा उठाना शुरू कर दिया है। डॉलर की तुलना में भारतीय रुपए की विनिमय दर का निर्यात अनुबंध करने में सफलता मिल रही है।
समझा जाता है कि भारतीय निर्यातक अभी तक एक लाख टन से अधिक चीनी का निर्यात सौदा कर चुके हैं। मध्य जनवरी तक की स्पॉट डिलीवरी के लिए चीनी के हुए इस सौदे के तहत चीनी का शिपमेंट अब कुछ किया जा रहा है। सही समय पर इसका शिपमेंट आरंभ हो जाने की उम्मीद है।
निर्यात की अनुमति मिलने के बावजूद आशंका व्यक्त की जा रही थी कि भारत से चीनी का शिपमेंट करने में भारी कठिनाई होगी क्योंकि यह आर्थिक दृष्टि से प्रतिस्पर्धी नहीं है।
वैश्विक बाजार भाव घटकर काफी नीचे आने तथा भारतीय बाजार में भाव ऊंचा रहने से इसकी खरीद में विदेशी आयातकों की दिलचस्पी बहुत कम रहने की संभावना व्यक्त की जा रही थी।
लेकिन भारतीय रुपया की विनिमय दर में जोरदार गिरावट आने से विदेशी खरीदारों को भारत से चीनी की खरीद लाभप्रद लगने लगी।
एक अमरीकी डॉलर का मूल्य बढ़कर 90 रुपए से भी ऊपर पहुंच गया है। इससे डॉलर में चीनी का दाम काफी आकर्षक हो गया है।
इसे देखते हुए अगले कुछ दिनों में और अधिक मात्रा में चीनी का निर्यात अनुबंध होने की संभावना है। इस 1 लाख टन चीनी का सौदा उस समय हुआ था जब 1 डॉलर 88 रुपए के बराबर चल रहा था।
भारतीय चीनी के प्रमुख खरीदारों में अफगानिस्तान, श्रीलंका, सोमालिया, यमन, केन्या, अन्य अफ्रीकी देश एवं मध्य पूर्व एशिया के कुछ देश शामिल हैं।
हालांकि चीनी के फ्री ऑन बोर्ड निर्यात ऑफर मूल्य के बारे में निर्यातकों के अलग-अलग विचार सामने आ रहे हैं मगर ऐसा लगता है कि यह 440-450 डॉलर प्रति टन के बीच रहा जिसमें शिपमेंट खर्च एवं बीमा व्यय आदि शामिल नहीं है।
