सुपारी के गैर कानूनी आयात को रोकने के लिए ओरिजिन का नियम सत्यापित
10-Dec-2025 02:10 PM
नई दिल्ली। केन्द्र सरकार ने कहा है कि केन्द्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीईसी) मूल उदगम के नियमों का सत्यापन कर रहा है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि जो देश 'ड्यूटी फ्री टैरिफ प्रिफरेंस (डीएफटीपी) स्कीम के अंतगत शामिल नहीं हैं
उन देशों के माध्यम से डीएफटीपी वाले देशों में उत्पादित अमरीका सुपारी का भारत में शुल्क मुक्त आयात न हो सके।
कुछ देशों को व्यापार समझौतों के अंतर्गत शुल्क से छूट दी गई है लेकिन अन्य आपूर्तिकर्ता देश इसका नाजायज फायदा उठाकर भारत में गैर कानूनी तरीके से सुपारी का निर्यात करते हैं।
उल्लेखनीय है कि मौजूदा व्यापार समझौते के अंतर्गत दुनिया के सबसे कम विकसित निर्यातक देशों से भारत में शून्य सीमा शुल्क पर सुपारी के आयात की अनुमति दी गई है और भारतीय उत्पादकों पर इसका असर पड़ रहा है।
केन्द्रीय वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री का कहना है कि कस्टम्स फील्ड फार्मेशन / सीएफएफ तथा केन्द्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) के अधीनस्थ निकाय- राजस्व सतर्कता निदेशालय द्वारा भारत में वायु मार्ग, समुद्री मार्ग एवं स्थलीय मार्ग से पोर्ट पर गैर कानूनी तरीके से पहुंचने वाली सुपारी के परिवहन पर नियमित रूप से गहरी नजर रखी जा रही है और ऐसे आयात को रोकने के लिए प्रचलित नियमों को प्रावधानों के अनुरूप उपयुक्त कार्रवाई भी की जा रही है।
सबसे कम विकसित निर्यातक देशों (एलडीईसी) जैसे बांग्ला देश, म्यांमार एवं भूटान आदि से वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान भारत में कुल 21,160 टन सुपारी का आयात हुआ जो भारत के कुल उत्पादन 14 लाख टन का महज करीब 1.50 प्रतिशत था। इससे पूर्व इन देशों से 2022-23 में 32,238 टन सुपारी का आयात किया गया था।
इसका प्रमुख कारण सुपारी के लिए न्यूनतम आयात मूल्य (मिप) को 251 रुपए प्रति किलो से बढ़कर फरवरी 2023 में 351 रुपए प्रति किलो नियत करना माना जा रहा है।
सुपारी एवं मसाला विकास निदेशालय के आंकड़ों का हवाला देते हुए वाणिज्य राज्य मंत्री ने कहा कि पिछले चार साल से घरेलू प्रभाग में सुपारी का औसत वार्षिक मूल्य 40,000 रुपए प्रति क्विंटल (400 रुपए प्रति किलो) से ऊपर चल रहा है और इसमें ज्यादा गिरावट आने के कोई संकेत नहीं मिले हैं।
सुपारी के लिए फरवरी 2023 से ही 351 रुपए प्रति किलो का न्यूनतम आयात मूल्य लागू इसलिए देश में हल्की या घटिया क्वालिटी की सस्ती सुपारी के आयात पर काफी हद तक अंकुश लगा हुआ है।
