साप्ताहिक समीक्षा-चीनी

05-Apr-2025 06:33 PM

सामान्य कारोबार के बीच चीनी के दाम में सीमित उतार-चढ़ाव  

नई दिल्ली। हालांकि कोल्ड ड्रिंक्स तथा आइसक्रीम निर्माण उद्योग में चीनी की मांग और खपत तेजी से बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं और घरेलू उपयोग भी सामान्य ढंग से हो रहा है लेकिन आपूर्ति की स्थिति बेहतर रहने से कीमतों में सीमित उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। 
मिल डिलीवरी भाव 
29 मार्च से 4 अप्रैल वाले सप्ताह के दौरान चीनी का मिल डिलीवरी भाव पूर्वी उत्तर प्रदेश में 5 रुपए तथा बिहार में 10 रुपए प्रति क्विंटल सुधर गया मगर पश्चिमी उत्तर प्रदेश एवं मध्य प्रदेश में 20-20 रुपए नीचे गिर गया। गुजरात में चीनी के दाम में अच्छी बढ़ोत्तरी दर्ज की गई क्योंकि वहां औद्योगिक मांग बेहतर रही। 
हाजिर भाव 
चीनी का हाजिर बाजार भाव दिल्ली में 4300/4400 रुपए प्रति क्विंटल के पिछले स्तर पर बरकरार रहा और रायपुर में भी 4150/4225 रुपए प्रति क्विंटल के पिछले स्तर में कोई बदलाव नहीं आया मगर इंदौर में यह 20 रुपए सुधरकर 4150/4250 रुपए प्रति क्विंटल पर पहुंच गया। 
मुम्बई 
मुम्बई (वाशी) मार्केट में चीनी की कीमत 3950/4150 रुपए प्रति क्विंटल पर स्थिर रही और इसका नाका पोर्ट डिलीवरी मूल्य भी 3900/4100 रुपए प्रति क्विंटल के पिछले स्तर पर बरकरार रहा। दरअसल चीनी के निर्यात में लगभग ठहराव आ गया है जिससे कीमतों में तेजी पर अंकुश लगा हुआ है। 
निर्यात 
मालूम हो कि सरकार ने जनवरी में 2024-25 के मार्केटिंग सीजन में निर्यात के लिए मिलर्स को 10 लाख टन चीनी का कोटा आवंटित किया था लेकिन गैर प्रतिस्पर्धी मूल्य के कारण भारत को चीनी का निर्यात अनुबंध एवं शिपमेंट करने में कठिनाई हो रही है। मार्च के अंत तक करीब 4 लाख टन चीनी का शिपमेंट हो सका जबकि कुल अनुबंध 6 लाख टन होने का अनुमान है। 
कोटा 
अप्रैल माह के दौरान घरेलू प्रभाग में बिक्री के लिए 23.50 लाख टन चीनी का फ्री सेल कोटा नियत किया गया है जो मार्च के कोटा 23 लाख टन से 50 हजार टन ज्यादा है। वैसे बढ़ती गर्मी को देखते हुए इस कोटे को भारी-भरकम नहीं माना जा रहा है। मार्च के दूसरे हाफ में चीनी के दाम में थोड़ी नरमी आई थी लेकिन अब बाजार पुनः सामान्य स्तर पर पहुंच गया है। 
उत्पादन 
चीनी के घरेलू उत्पादन में 50-60 लाख टन की भारी गिरावट आने का अनुमान है इसलिए कीमतों पर ज्यादा दबाव पड़ने की संभावना नहीं है लेकिन यदि कीमतों में मनमानी वृद्धि का प्रयास किया गया तो इसकी मांग प्रभावित हो सकती है। महाराष्ट्र कर्नाटक में चीनी के टेंडर मूल्य में उतार-चढ़ाव देखा गया।