साप्ताहिक समीक्षा-गेहूं

14-Dec-2024 07:41 PM

सरकारी स्टॉक की बिक्री का थोक मंडी भाव पर कोई असर नहीं 

नई दिल्ली (भारती एग्री एप्प)। हालांकि भारतीय खाद्य निगम द्व्रारा 4 दिसम्बर से खुले बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) के तहत केन्द्रीय पूल से गेहूं की साप्ताहिक बिक्री शुरू की गई और दो सप्ताहों में करीब 2 लाख टन गेहूं मिलर्स-प्रोसेसर्स को सस्ते दाम पर बेचा गया लेकिन थोक मंडी भाव पर इसका कोई मनोवैज्ञानिक असर नहीं देखा जा रहा है। सरकारी गेहूं की बिक्री होने के बावजूद 7 से 13 दिसम्बर वाले सप्ताह के दौरान प्रमुख उत्पादक राज्यों की मंडियों में गेहूं का भाव या तो स्थिर या ऊंचा रहा। 

दिल्ली 

समीक्षाधीन सप्ताह के दौरान दिल्ली में यूपी / राजस्थान के गेहूं का दाम 50 रुपए बढ़कर 3080/3090 रुपए प्रति क्विंटल पर पहुंच गया। उधर गुजरात की राजकोट मंडी में भाव 100 रुपए मध्य प्रदेश की इंदौर मंडी में 30 रुपए तेज रहा। मध्य प्रदेश के भोपाल, इटारसी तथा डबरा में भी गेहूं के दाम में क्रमश: 100 रुपए, 45 रुपए एवं 20 रुपए प्रति क्विंटल की तेजी दर्ज की गई। राजस्थान की कोटा मंडी में गेहूं का मूल्य 20 रुपए नरम पड़कर 2775/2880 रुपए प्रति क्विंटल पर आया मगर उत्तर प्रदेश की कुछ मंडियों में इसमें अच्छी बढ़ोत्तरी दर्ज की गई। 

कोटा 

सरकारी गेहूं का बिक्री 31 मार्च 2025 तक जारी रखने का निर्णय लिया गया है और इस अवधि के लिए 25 लाख टन का कोटा आवंटित किया गया है। महत्वपूर्ण मंडियों में गेहूं की सीमित आवक हो रही है और मिलर्स-प्रोसेसर्स तथा व्यापारी इसकी खरीद में अच्छी दिलचस्पी दिखा रहे हैं। 

बिजाई 

प्रमुख उत्पादक राज्यों में गेहूं की बोआई भी जारी है मगर कुछ खास कारणों से इस बार पंजाब, हरियाणा एवं राजस्थान जैसे प्रांतों में बिजाई क्षेत्र घटने के संकेत मिल रहे हैं। मौसम की हालत पूरी तरह अनुकूल नहीं है। 

उत्पादन  

अत्यन्त ऊंचे बाजार भाव को देखते हुए चालू रबी सीजन में राष्ट्रीय स्तर पर गेहूं के उत्पादन क्षेत्र में भारी बढ़ोत्तरी होने का अनुमान लगाया जा रहा था मगर मौजूदा परिदृश्य से प्रतीत होता है कि कुल  बिजाई क्षेत्र 312 लाख हेक्टेयर के सामान्य औसत क्षेत्रफल के आसपास सिमट सकता है। 

स्टॉक 

सरकार के पास गेहूं का सीमित स्टॉक बचा हुआ है और किसानों के पास भी लम्बा-चौड़ा स्टॉक नहीं है। इसके फलस्वरूप बाजार भाव पर दबाव पड़ने की संभावना कम है।