साप्ताहिक समीक्षा-गेहूं

05-Apr-2025 06:55 PM

नए माल की आपूर्ति बढ़ने से गेहूं के दाम पर दबाव 

नई दिल्ली। मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान एवं गुजरात जैसे प्रांतों में 10-15 मार्च से ही मंडियों में नए गेहूं की आपूर्ति शुरू हो गई थी जबकि अब पंजाब- हरियाणा में भी इसकी आवक का मार्केटिंग सीजन 1 अप्रैल से औपचारिक तौर पर आरंभ हो गया है। केन्द्रीय कृषि मंत्रालय ने इस वर्ष गेहूं का घरेलू उत्पादन बढ़कर 1154.30 लाख टन के सर्वकालीन सर्वोच्च स्तर पर पहुंचने का अनुमान लगाया है जिससे इस महत्वपूर्ण खाद्यान्न की कीमतों पर दबाव बढ़ने लगा है। 
दिल्ली 
हालांकि 29 मार्च से 4 अप्रैल वाले सप्ताह के दौरान दिल्ली में यूपी का गेहूं 2650 रुपए प्रति क्विंटल पर स्थिर रहा और मध्य प्रदेश के इंदौर में स्थानीय गेहूं का भाव 80 रुपए सुधरकर 2400-2980 रुपए प्रति क्विंटल पर पहुंच गया मगर अन्य राज्यों और खासकर उत्तर प्रदेश की मंडियों में दाम घट गया। 
मध्य प्रदेश 
मध्य प्रदेश में किसानों से 2600 रुपए प्रति क्विंटल तथा राजस्थान में 2575 रुपए प्रति क्विंटल की दर से गेहूं की सरकारी खरीद हो रही है क्योंकि वहां केन्द्र सरकार द्वारा घोषित 2425 रुपए प्रति क्विंटल के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से ऊपर क्रमश: 175 रुपए एवं 150 रुपए प्रति क्विंटल का अतिरिक्त बोनस देने की घोषणा की गई है। 
भाव 
समीक्षाधीन सप्ताह के दौरान गेहूं का थोक मंडी भाव मध्य प्रदेश के इटारसी में 30 रुपए, राजस्थान के कोटा में 100 रुपए, बारां में 50 रुपए तथा उत्तर प्रदेश की विभिन्न मंडियों में 50 से 140 रुपए प्रति क्विंटल तक की भारी गिरावट दर्ज की गई। अधिकांश मंडियों में सामान्य औसत क्वालिटी (एफएक्यू) के गेहूं का भाव घटकर सरकारी समर्थन मूल्य के आसपास या उससे नीचे आ गया है। मिलर्स- प्रोसेसर्स एवं व्यापारी / स्टॉकिस्ट गेहूं की खरीद में जल्दबाजी नहीं दिखा रहे हैं और बाजार में स्थिरता आने का इंतजार कर रहे हैं। सभी प्रमुख उत्पादक प्रांतों में गेहूं की खरीद के लिए सरकारी एजेंसियां पूरी तरह सक्रिय हो गई हैं। 
उत्पादन अनुमान 
ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार द्वारा रिकॉर्ड उत्पादन के लगाए गए अनुमान का गेहूं के घरेलू बाजार पर गहरा मनोवैज्ञानिक असर पड़ रहा है। वास्तविक उत्पादन इससे कम होने की संभावना है मगर किसान असमंजस की हालत में हैं। छोटे किसान अपने गेहूं को जल्दी-जल्दी बेच सकते हैं। 
सरकारी खरीद 
अप्रैल से जून तक मंडियों में तथा सरकारी क्रय केन्द्रों पर गेहूं की जोरदार आपूर्ति होती रहेगी और उसके बाद इसमें गिरावट का दौर शुरू हो सकता है। सरकार ने 313 लाख टन गेहूं खरीदने का लक्ष्य रखा है और उसे यह लक्ष्य आसानी से हासिल हो जाने का भरोसा है।