साप्ताहिक समीक्षा-हल्दी

05-Apr-2025 07:36 PM

हल्दी कीमतों में तेजी : अधिक मंदे की संभावना नहीं 

नई दिल्ली। चालू सप्ताह के दौरान हल्दी की कीमतों में तेजी रही। सूत्रों का कहना है कि इरोड, निजामाबाद एवं सांगली लाइन पर कुल उत्पादन का लगभग 65/70 प्रतिशत माल मंडियों में आ जाने के कारण आवक घटने लगी है। इसके अलावा मराठवाड़ा लाइन पर भी आवक आशानुरूप नहीं हो रही है। हालांकि चालू सीजन के लिए उत्पादक केन्द्रों पर हल्दी के बिजाई क्षेत्र में वृद्धि हुई थी लेकिन प्रतिकूल मौसम एवं फसल में सड़न आदि होने के कारण उत्पादन बिजाई के अनुकूल नहीं हो रहा है। जिस कारण हल्दी उत्पादन के अनुमान लगातर घट रहे थे। पूर्व उत्पादन अनुमान 90/95 लाख बोरी के लगाए जा रहे थे जोकि बाद में घटकर 80/85 लाख बोरी के लगाए जाने लगे। वर्तमान में उत्पादन अनुमान 70/72 लाख बोरी के लगाए जा रहे हैं।
उत्पादकता कम 
वर्तमान में मराठवाड़ा लाइन पर नई हल्दी की आवक धीरे-धीरे बढ़ने लगी है। लेकिन मराठवाड़ा लाइन पर खेतों में कीटनाशक दवाइयों का अत्यधिक प्रयोग किए जाने के कारण प्रति हेक्टेयर उत्पादकता कम आ रही है। सूत्रों का कहना है कि आमतौर पर बसमत, हिंगोली, नांदेड लाइन पर हल्दी की प्रति हेक्टेयर उत्पादकता 25/30 क्विंटल की रहती है। लेकिन इस वर्ष उत्पादकता 15/20 क्विंटल की आने के समाचार मिल रहे हैं। उल्लेखनीय है कि मराठवाड़ा लाइन का कुल हल्दी उत्पादन में 40/45 प्रतिशत का योगदान रहता है।  
मंदा-तेजी 
चालू सप्ताह के दौरान वायदा एवं हाजिर बाजारों में हल्दी के दाम 10/15 रुपए प्रति किलो तेजी के साथ बोले गए। वायदा बाजार में हल्दी अप्रैल का भाव 13470 रुपए खुलने के पश्चात सप्ताह के अंत में 15100 रुपए पर बंद हुआ है जबकि मई का वायदा 13640 रुपए खुला था जोकि सप्ताह के अंत में 15202 रुपए पर बंद हुआ। वायदा में तेज समाचारों एवं मंडियों में आवक आशानुरूप न होने के कारण उत्पादक केन्द्रों की मंडियों सहित खपत केन्द्रों पर भी चालू सप्ताह के दौरान हल्दी के दाम 10/15 रुपए प्रति किलो तेजी के साथ बोले गए। जानकार सूत्रों का कहना है कि आगामी दिनों में मराठवाड़ा लाइन पर आवक का दबाव बनने पर कीमतों में 5/7 रुपए प्रति किलो का मंदा आ सकता है इससे अधिक मंदे की संभावना नहीं है। क्योंकि उत्पादक केन्द्रों पर स्टॉक भी कम रहने के कारण घटे भावों पर स्टॉकिस्टों की लिवाली आ जाएगी। साथ ही किसान भी माल रोकना शुरू कर देगा। साथ ही मराठवाड़ा को छोड़कर अन्य मंडियों में आवक भी सीमित रह जाएगी। सूत्रों का कहना है कि वर्तमान भावों में मंदे के नाम पर 5/7 रुपए एवं तेजी के लिए 10/15 रुपए की तेजी संभव है। 
उत्पादन 
चालू सीजन के दौरान महाराष्ट्र की मराठवाड़ा लाइन (हिंगोली, बसमत, नांदेड) पर हल्दी की पैदावार 28/30 लाख बोरी एवं सांगली लाइन पर 9/10 लाख बोरी उत्पादन के अनुमान लगाए जा रहे हैं। निजामाबाद लाइन पर 13/14 लाख बोरी एवं वारंगल 1/1.50 लाख बोरी उत्पादन होने की संभावना है। दुग्गीराला एवं कडप्पा लाइन पर पैदावार 2/2.50 लाख बोरी की मानी जा रही है। इरोड, सेलम में उत्पादन 10/11 लाख बोरी होने की संभावना है। अन्य क्षेत्र में उत्पादन 4/5 लाख बोरी माना जा रहा है। कुल मिलाकर इस वर्ष उत्पादन 70/72 लाख बोरी का रहेगा। जबकि गत वर्ष पैदावार 50/55 लाख बोरी की रही थी। 
स्टॉक कम 
हालांकि चालू सीजन के दौरान हल्दी की पैदावार गत वर्ष की तुलना में अधिक मानी जा रही है लेकिन बकाया स्टॉक गत वर्ष की तुलना में कम रह गया है। एक अनुमान के अनुसार गत वर्ष हल्दी का बकाया स्टॉक 3.5/40 लाख बोरी का था जोकि इस वर्ष 12/14 लाख बोरी माना जा रहा है। स्टॉक कम रहने के कारण वर्ष 2025 के दौरान हल्दी की कुल उपलब्धता खपत की तुलना में कम रहेगी। जिस कारण से उत्पादक केन्द्रों की मंडियों में आवक घटने के साथ ही कीमतों में तेजी बननी शुरू हो जाएगी। व्यापारिक सूत्रों का कहना है कि निर्यात एवं लोकल खपत को मिलाकर सालाना हल्दी की खपत लगभग 1/1.10 करोड़ बोरी के आसपास रहती है। जबकि इस वर्ष उपलब्धता 90/92 लाख बोरी की रहेगी। 
निर्यात 
मसाला बोर्ड द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार अप्रैल-दिसम्बर 2024 के दौरान हल्दी का निर्यात 136921 टन का हुआ है और निर्यात प्राप्त आय 2234.57 करोड़ की रही। जबकि गत वर्ष अप्रैल-दिसम्बर 2023 के दौरान 121170.98 टन हल्दी का निर्यात किया गया था। और प्राप्त आय 1322.36 करोड़ की रही थी। इस प्रकार एक ओर जहां निर्यात मात्रा में 13 प्रतिशत की वृद्धि हुई है वही आय में 69 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।