साप्ताहिक समीक्षा- जीरा
29-Nov-2025 07:24 PM
जीरा कीमतों में सुधार मगर अधिक तेजी की संभावना नहीं
नई दिल्ली। हाल ही में जीरा की कीमतों में सुधार दर्ज किया गया है। हाजिर बाजारों के साथ-साथ वायदा में भी मजबूती के साथ बोले जा रहे हैं। एक ओर जहां हाजिर बाजारों में जीरे के भाव 300/500 रुपए प्रति क्विंटल तेजी के साथ बोले गए है वहीं वायदा बाजार में दिसम्बर माह का जीरा 21740 रुपए खुलने के पश्चात सप्ताह के अंत में 22180 रुपए पर बंद हुआ है। जनवरी का वायदा 22480 रुपए पर बंद हुआ जबकि सप्ताह के शुरू में भाव 21845 रुपए पर खुला था।
वर्तमान में उत्पादक केन्द्रों पर जीरा बिजाई का कार्य जोरों पर चल रहा है और व्यापारियों का कहना है कि गुजरात में इस वर्ष जीरे की बिजाई गत वर्ष तुलना में 15/20 प्रतिशत कम क्षेत्रफल पर की जाएगी। हालांकि चलौ माह के दौरान गुजरात कृषि विभाग द्वारा जारी किए गए आंकड़ों में बिजाई का क्षेत्रफल गत वर्ष की तुलना में अधिक दर्शाया गया है जिससे व्यापारी सहमत नहीं है। राजस्थान में जीरे की बिजाई गत वर्ष के समान या कुछ घट सकती है। उल्लेखनीय है कि गत वर्ष देश में जीरे की बिजाई 11.71 लाख हेक्टेयर पर की गई थी वर्ष 2024 के दौरान 12.64 लाख हेक्टेयर पर जीरे की बिजाई हुई थी।
स्टॉक पर्याप्त
जानकारों का कहना है कि चालू सीजन के दौरान चीन को निर्यात कम होने के कारण भारतीय जीरे का निर्यात प्रभावित हुआ है। जिस कारण से उत्पादक केन्द्रों पर जीरे का पर्याप्त स्टॉक है। सूत्रों का कहना है कि वर्तमान में किसानों के पास 15/20 लाख बोरी का स्टॉक माना जा रहा है। इसके अलावा उत्पादक केन्द्रों की मंडियों में भी 20/25 लाख बोरी स्टॉक होने के समाचार मिल रहे हैं। जोकि नई फसल आने तक पर्याप्त है। नए मालों की आवक जनवरी माह में शुरू होने की संभावना है।
आवक अधिक
सूत्रों का कहना है कि स्टॉक की अधिकता के कारण मंडियों में जीरे की दैनिक आवक गत वर्षों की तुलना में अधिक चल रही है। प्रमुख उत्पादक राज्य गुजरात की मंडियों में दैनिक आवक 20/22 हजार बोरी की हो रही है जोकि गत वर्ष इसी समयावधि में 14/15 हजार बोरी की रही थी। राजस्थान की मंडियों में भी 7000/8000 बोरी दैनिक हो रही है जोकि गत वर्ष से अधिक है।
अधिक तेजी नहीं
जानकारों का कहना है कि जीरे की वर्तमान कीमतों में अब अधिक की संभावना नहीं है। क्योंकि एक ओर जहां निर्यात मांग सीमित है वहीं दूसरी तरफ आवक भी बराबर बनी हुई है। विगत एक पखवाड़े के दौरान जीरे के निर्यात भाव में अच्छी तेजी रही। प्राप्त जनकारी के अनुसार 13 नवम्बर- 2025 को जीरे का निर्यात भाव 4030 रुपए प्रति 20 किलो चल रहा था जोकि वर्तमान में 4250 रुपए बोला जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि हो सकता है कि आगामी दिनों में जीरे का निर्यात भाव 4300 रुपए बन जाए। मगर इससे अधिक तेजी हाल-फिलहाल संभव नहीं है अधिक मंदा-तेजी बिजाई की स्थिति स्पष्ट होने के पश्चात ही लगाया जाएगा। अगर बिजाई संतोषजनक रहती है तो जीरे के वर्तमान दामों में 300/500 रुपए प्रति क्विंटल का मन्दा-तेजी चलता रहेगा।
उत्पादन
उत्पादकों को उनकी उपज का उचित मूल्य न मिलने के कारण संभावना व्यक्त की जा रही है कि दूसरे वर्ष भी देश में जीरे का उत्पादन घटेगा। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2024 के दौरान देश में जीरे का उत्पादन 1.10 करोड़ बोरी (प्रत्येक बोरी 55 किलो) का माना गया था जोकि वर्ष 2025 में घटकर 90/92 लाख बोरी का रह गया। अभी की स्थिति को देखते हुए संभावना व्यक्त की जा रही है कि वर्ष 2026 के दौरान उत्पादन में और गिरावट आएगी।
निर्यात कम
सूत्रों का कहना है कि निर्यात देशों की कमजोर मांग के कारण चालू सीजन के दौरान जीरे निर्यात में कमी आई है। मसाला बोर्ड द्वारा जारी किए आंकड़ों के अनुसार अप्रैल-अगस्त- 2025 में भारतीय जीरे का निर्यात 92810 टन का रहा जोकि गत वर्ष की इसी समयावधि की तुलना में 17 प्रतिशत कम है। भाव नीचे होने एवं निर्यात की मात्रा भी घटने के कारण निर्यात से प्राप्त आय में 28 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है और प्राप्त आय 2208.73 करोड़ की रही।
