साप्ताहिक समीक्षा- लालमिर्च
14-Feb-2026 08:20 PM
लालमिर्च की कीमतों में गिरावट मगर अधिक मंदा नहीं
नई दिल्ली। चालू सप्ताह के दौरान लालमिर्च की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है लेकिन पैदावार कम होने के कारण कीमतों में अधिक मन्दा संभव नहीं है। उल्लेखनीय है कि इस वर्ष सभी उत्पादक केन्द्रों पर लालमिर्च के बिजाई क्षेत्र में कमी आई है। जिस कारण से उत्पादन भी गत वर्ष की तुलना में कम होने के समाचार है। बहरहाल उत्पादक उत्पादक केन्द्रों की मंडियों पर नए मालों की आवक बढ़ने एवं नए मालों में नमी होने के कारण निर्यातकों की लिवाली कमजोर बनी रहने के कारण तेजा क्वालिटी के भाव 400/500 रुपए प्रति क्विंटल तक मंदे के साथ बोले गए। अभी कीमतों में मंदे की संभावना है। लेकिन अधिक नहीं। वर्तमान में गुंटूर मंडी में तेजा का भाव 18200 रुपए एवं खम्मम में 18400 रुपए प्रति क्विंटल बोला जा रहा है। उल्लेखनीय है कि जनवरी माह के अंत में गुंटूर मंडी में भाव 20500 रुपए एवं खम्मम में 21100 रुपए बन गया था।
बिजाई कम
उत्पादकों को उनकी उपज का उचित मूल्य न मिलने के कारण गत दो वर्षों से उत्पादक केन्द्रों पर लालमिर्च की बिजाई घटती जा रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार चालू सीजन के दौरान आंध्र प्रदेश में लालमिर्च की बिजाई 259119 एकड़ पर की गई। जबकि गत वर्ष बिजाई 363539 एकड़ पर की गई थी वर्ष 2023 में बिजाई का क्षेत्रफल 571722 एकड़ का रहा था। तेलंगाना में भी चालू सीजन के दौरान लालमिर्च की बिजाई 138460 एकड़ पर की गई। जबकि गत वर्ष बिजाई का क्षेत्रफल 222370 एकड़ का रहा था। वर्ष 2023 में बिजाई 341326 एकड़ पर की गई थी। इससे पूर्व मध्य प्रदेश में भी इस वर्ष लालमिर्च की बिजाई 40/50 प्रतिशत कम रही थी। कर्नाटक में भी बिजाई का क्षेत्रफल गत वर्ष की तुलना में 30/40 प्रतिशत कम रहने के समाचार मिल रहे है।
घटेगा उत्पादन
उत्पादक केन्द्रों पर बिजाई क्षेत्रफल में कमी आने एवं प्रतिकूल मौसम के चलते इस वर्ष आंध्र प्रदेश में लालमिर्च का उत्पादन सवा करोड़ बोरी के आसपास होने के अनुमान लगाए जा रहे हैं। जबकि वर्ष 2024 में उत्पादन डेढ़ करोड़ बोरी एवं वर्ष 2023 में 2 करोड़ बोरी के आसपास माना गया था।
तेलंगाना में भी उत्पादन गत वर्ष के 60/65 लाख बोरी के मुकाबले 45/50 लाख बोरी होने के अनुमान लगाए जा रहे हैं। जबकि वर्ष 2023 में उत्पादन 70/75 लाख बोरी का माना गया था। मध्य प्रदेश की फसल समाप्त हो चुकी है। इस वर्ष मध्य प्रदेश में लालमिर्च का उत्पादन 18/20 लाख बोरी माना गया है जबकि गत वर्ष उत्पादन लगभग 30 लाख बोरी का माना गया था।
आवक
वर्तमान में आंध्र प्रदेश की प्रमुख मंडी गुंटूर में नए मालों की आवक 75/80 हजार बोरी की होने लगी है। खम्मम में आवक 20/25 हजार बोरी एवं वारंगल 14/15 हजार बोरी की हो रही है। सूत्रों का कहना है कि आगामी सप्ताह से मंडियों में सूखे मालों की आवक बढ़ने लगेगी।
मन्दा तेजी
व्यापारियों का कहना है कि आगामी दिनों में लालमिर्च के भाव दबे रहेंगे क्योंकि मंडियों में आवक का दबाव बनेगा। लेकिन आवक कम होने के साथ ही कीमतों में तेजी का दौर शुरू हो जाएगा। क्योंकि बकाया स्टॉक कम होने के साथ-साथ पैदावार भी कम मानी जा रही है। सूत्रों का कहना है कि फरवरी माह में आवक का दबाव बनने पर लालमिर्च के दामों में 10/15 रुपए प्रति किलो की गिरावट आ सकती है। जबकि भविष्य में भाव कभी भी 220/225 का स्तर छू सकते हैं।
निर्यात
गत सीजन में लालमिर्च की कीमतें नीची बनी रहने के कारण लालमिर्च के निर्यात में 27 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई जबकि आय में 8 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। मसाला बोर्ड द्वारा जारी किए आंकड़ों के अनुसार अप्रैल-नवम्बर-2025 के दौरान लालमिर्च का निर्यात 481446 टन का हुआ और निर्यात से प्राप्त आय 6634 करोड़ की रही। जबकि अप्रैल-नवम्बर-2024 में लालमिर्च का निर्यात 378061 टन का रहा और प्राप्त आय 6163.47 करोड़ की रही थी। वर्ष 2024-25 (अप्रैल-मार्च) के दौरान लालमिर्च का कुल निर्यात 715506 टन का हुआ था और निर्यात से प्राप्त आय 11404.90 करोड़ की रही।
