साप्ताहिक समीक्षा- सोयाबीन

13-Dec-2025 08:04 PM

क्रशिंग इकाइयों की कमजोर मांग से सोयाबीन में नरमी 

नई दिल्ली। मूल्य संवर्धित उत्पादों की मांग कमजोर रहने से क्रशिंग- प्रोसेसिंग इकाइयों ने 6-12 दिसम्बर वाले सप्ताह के दौरान सोयाबीन की खरीद में ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाई जिससे तीनों शीर्ष उत्पादक प्रांतों- मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र एवं राजस्थान में इस महत्वपूर्ण तिलहन के प्लांट डिलीवरी मूल्य में नरमी का माहौल देखा गया। 
राजस्थान 
उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र एवं राजस्थान में किसानों से 5328 रुपए प्रति क्विंटल के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर सोयाबीन की  सरकारी खरीद हो रही है लेकिन फिर भी प्लांट डिलीवरी भाव में तेजी के बजाए नरमी का वातावरण बना हुआ है। मध्य प्रदेश में सोयाबीन के लिए इस बार भावान्तर भुगतान योजना लागू की गई है। 
प्लांट भाव 
सोयाबीन का प्लांट डिलीवरी मूल्य अब भी 4500/4700 रुपए प्रति क्विंटल के बीच चल रहा है जो सरकारी समर्थन मूल्य से काफी नीचे है। लेकिन आगामी समय में कुछ विशेष कारणों से सोयाबीन के दाम में तेजी आने की संभावना व्यक्त की जा रही है। 
आयात खर्च 
डॉलर के मुकाबले रुपए का मूल्य घटकर सबसे नीचे स्तर पर आ जाने से खाद्य तेलों का आयात खर्च ऊंचा हो गया है इसलिए भारतीय रिफाइनर्स द्वारा अब तक दिसम्बर-जनवरी शिपमेंट के लिए करीब 70 हजार टन सोयातेल का आयात अनुबंध निरस्त किया जा चुका है। इससे स्वदेशी सोया तेल की मांग बढ़ने की संभावना है।
सोया तेल (रिफाइंड) 
समीक्षाधीन सप्ताह के दौरान सोया रिफाइंड तेल के दाम में भी 5-10 रुपए प्रति 10 किलो की नरमी दर्ज की गई क्योंकि इसकी मांग कमजोर रही दिलचस्प तथ्य यह है कि राजस्थान के कोटा में अच्छे कारोबार के कारण सोया रिफाइंड तेल का दाम 35 रुपए की वृद्धि के साथ 1280 रुपए प्रति 10 किलो पर पहुंचा मगर गुजरात के कांडला में 30 रुपए गिरकर 1250 रुपए प्रति 10 किलो पर आ गया। मुम्बई और हल्दिया में कीमतें लगभग स्थिर बनी रहीं।
सोया खल (डीओसी)
सोया डीओसी में घरेलू एवं निर्यात मांग कमजोर रहने से कीमतों पर असर पड़ा और इसके दाम में 800-900 रुपए प्रति टन तक की भारी गिरावट आ गई। महाराष्ट्र की एक इकाई में भाव 900 रुपए घटकर 34300 रुपए प्रति टन पर आ गया। इसी तरह एक अन्य प्लांट में यह 1000 रुपए लुढ़ककर 34000 रुपए प्रति टन रह गया। राजस्थान में भी भाव कुछ नरम देखा गया।