साप्ताहिक समीक्षा- धान-चावल

06-Dec-2025 07:41 PM

साप्ताहिक समीक्षा- धान-चावल         

मांग एवं आपूर्ति के अनुरूप धान और चावल के दाम में उतार-चढ़ाव  

नई दिल्ली। खरीफ कालीन धान की कटाई-तैयारी एवं मंडियों में आपूर्ति का अभी पीक सीजन चल रहा है और बासमती तथा गैर बासमती धान की भारी आवक के बीच प्राइवेट फर्मों, मिलिंग इकाइयों तथा सरकारी एजेंसियों द्वारा इसकी जोरदार खरीद की जा रही है। सरकार द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर केवल गैर बासमती धना की खरीद की जाती है जबकि मिलर्स- प्रोसेसर्स एवं व्यापारी सामान्य श्रेणी के साथ-साथ बासमती धान की खरीद भी करते हैं।
आवक  
29 नवम्बर से 5 दिसम्बर वाले सप्ताह के दौरान दिल्ली की नरेला मंडी में 30 हजार बोरी से लेकर 70 हजार बोरी तक धान की दैनिक आवक हुई और संतुलित खरीद होने से इसके दाम में थोड़ी-बहुत बढ़ोत्तरी दर्ज की गई। नजफगढ़ मंडी में 5-10 हजार बोरी धान पहुंचा और अच्छी लिवाली के कारन 1509 हैण्ड बासमती धान का भाव 250 रुपए की वृद्धि के साथ 3000/3200 रुपए प्रति क्विंटल पर पहुंच गया। 
छत्तीसगढ़  
उधर छत्तीसगढ़ की भाटापाड़ा एवं राजिम मंडी में 4-6 हजार बोरी धान की अलग-अलग आवक के साथ कीमतों में 100 रुपए प्रति क्विंटल का उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया। पंजाब के अमृतसर में औसतन 15 हजार बोरी धान की रोजाना आपूर्ति हुई और इसमें कारोबार बेहतर होने से कीमतों में अच्छा सुधार देखा गया। लेकिन तरन तारन मंडी में भाव अपेक्षाकृत शांत रहा। 
उत्तर प्रदेश 
उत्तर प्रदेश की विभिन्न मंडियों जैसे एटा, मैनपुरी, अलीगढ़, जहांगीराबाद, शाहजहांपुर तथा खैर आदि में लम्बे समय से धान की भारी आवक हो रही है जिससे वहां उत्पादन बेहतर होने का स्पष्ट संकेत मिल रहा है। लेकिन पंजाब में धान की फसल को बाढ़-वर्षा से नुकसान हुआ। इसका प्रमाण यह है कि गैर बासमती धान की सरकारी खरीद में काफी कमी आ गई और बासमती धान की आवक भी संतोषजनक नहीं है।
चावल  
जहां तक चावल का सवाल है तो मांग एवं आपूर्ति के अनुरूप इसकी कीमतों में भी उतार-चढ़ाव दर्जा किया गया। डॉलर के मुकाबले रुपया की विनिमय दर लुढ़ककर सबसे नीचे स्तर पर आने से चावल निर्यातकों को अपने उत्पाद का निर्यात ऑफर मूल्य काफी हद तक प्रतिस्पर्धी स्तर पर रखने में सहायता मिल रही है। 
अमृतसर 
अमृतसर, बूंदी, नया बाजार (दिल्ली) एवं कुछ अन्य मार्किट में चावल की खरीद में घरेलू व्यापारियों एवं निर्यातकों की अच्छी सक्रियता देसी गई जिससे बेहतर कारोबार के साथ कीमतों में तेजी आई।