सरकार को ओजीएल के तहत चीनी के निर्यात पर विचार करने का सुझाव
25-Nov-2025 05:03 PM
मुम्बई। एक अग्रणी उद्योग- व्यापार विश्लेषक ने 2025-26 के वर्तमान मार्केटिंग सीजन के दौरान करीब 340 लाख टन चीनी के घरेलू उत्पादन का अनुमान लगाते हुए कहा है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश तथा कर्नाटक एवं महाराष्ट्र के कुछ भागों में गन्ना से चीनी की रिकवरी दर कमजोर देखी जा रही है।
चालू सीजन में चीनी का बाजार इसकी मांग एवं खपत से संचालित होगा। हालांकि कुछ संगठन चीनी की घरेलू खपत में थोड़ी कमी आने की संभावना व्यक्त कर रहे हैं लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि चीनी की खपत 290 लाख टन के आसपास स्थिर रहेगी।
विश्लेषक के अनुसार करीब 45 लाख टन के बकाया स्टॉक और 340 लाख टन के उत्पादन के साथ चीनी की कुल उपलब्ध्ता 385 लाख टन पर पहुंचेगी। इसमें से 290 लाख टन का खाद्य उद्देश्य में तथा 36.50 लाख टन का एथनॉल निर्माण में उपयोग होगा और 15 लाख टन का निर्यात किया जाएगा जिसकी अनुमति पहले ही दी जा चुकी है।
इस तरह मांग एवं आपूर्ति का संतुलन पूरा होने के बाद उद्योग के पास सीजन के अंत में चीनी का सुविधाजनक अधिशेष स्टॉक मौजूद रह सकता है। यदि घरेलू उत्पादन में मौजूदा अनुमान से ज्यादा की वृद्धि होती है तो 5 लाख टन अतिरिक्त चीनी का निर्यात आसानी से किया जा सकता है।
इस अग्रणी विश्लेषक का मानना है कि सरकार को खुले सामान्य लाइसेंस (ओजीएल) के अंतर्गत चीनी के निर्यात की अनुमति देने पर गम्भीरतापूर्वक विचार करना चाहिए। इससे बंदरगाहों के निकट अवस्थित इकाइयों को अपनी रणनीति के अनुसार चीनी का शिपमेंट करने का अवसर मिलेगा और सरकार को भी वास्तविक आंकड़े की जानकारी रहेगी।
जब भी आवश्यक लगे तब सरकार चीनी के निर्यात पर रोक लगा सकती है। भारत अगले 3-4 वर्षों में चीनी का एक निश्चित ढांचागत निर्यातक देश बनने की राह पर अग्रसर है और इसलिए इसकी तैयारी अभी से शुरू हो जाए तो अच्छा है।
वैश्विक स्तर पर चीनी का 16.50 से 20 लाख टन तक अधिशेष उत्पादन होने की उम्मीद है और इसका भाव 14 से 16.50 सेंट प्रति पौंड के बीच रह सकता है। ब्राजील में लगभग 400 लाख टन चीनी का उत्पादन होने का अनुमान है।
