सरकारी स्टॉक से सरसों और सोयाबीन की बिक्री होने से कीमतों पर पड़ेगा दबाव

04-Jun-2025 10:59 AM

नई दिल्ली। केन्द्र सरकार की अधीनस्थ एजेंसी- नैफेड द्वारा पिछले खरीफ सीजन में सोयाबीन तथा मूंगफली की भारी खरीद किसानों ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर की गई। उसी तरह 2025 के रबी मार्केटिंग सीजन में सरसों की अच्छी खरीद की गई।

अब इस स्टॉक को बेचने की प्रक्रिया आरंभ हो गई है जिससे बाजार में इसकी आपूर्ति एवं उपलब्धता बढ़ेगी और कीमतों पर दबाव पड़ेगा। इससे किसानों को अपने पास मौजूद तिलहनों के शेष स्टॉक को लाभप्रद मूल्य पर बेचने के लिए कठिन संघर्ष करना पड़ सकता है। 

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 5 जून 2025 को हरियाणा के कई केन्द्रों पर 1,01,758 टन सरसों की बिक्री का टेंडर जारी किया गया जिसकी नीलामी का समय दोपहर 12.00 से 12.45 बजे के बीच निर्धारित किया गया है।

जिन केन्द्रों पर नीलामी की प्रक्रिया आयोजित होगी उसमें हिसार, फतेहाबाद, भिवानी, रेवाड़ी, झज्जर, महेन्द्र गढ़ और पलवल शामिल है। सरसों की नीलामी बिक्री पहले से ही होती रही है। 

अब सरकारी एजेंसी ने सोयाबीन की बिक्री के लिए भी 4 जून 2025 को एक टेंडर जारी किया है जिसका समय पूर्वाहन 11.00 से 11.30 बजे के बीच नियत किया गया है।

इसके तहत तेलंगाना के 20 केन्द्रों पर 44828.2 टन तथा मध्य प्रदेश के केन्द्रों पर 2,36,219 टन सोयाबीन की नीलामी की जानी है। 

चूंकि थोक मंडी भाव नियमित रूप से न्यूनतम समर्थन मूल्य से नीचे रहा इसलिए सरकार को तिलहनों की विशाल खरीद करने के लिए विवश होना पड़ा।

अब तिलहनों के उस स्टॉक को बेचा जा रहा है। सोयाबीन का भाव अब भी 4892 रुपए प्रति क्विंटल के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से काफी नीचे चल रहा है। 

इससे पूर्व 2 जून 2025 को जो नीलामी आयोजित हुई थी उसमें सोयाबीन की बिक्री 4370 रुपए प्रति क्विंटल की दर से की गई। इस तरह सरकार द्वारा 522 रुपए प्रति क्विंटल के घाटे के साथ सोयाबीन की बिक्री की गई। किसान भी इस बिक्री से संतुष्ट नहीं हैं।