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सरसों एवं मसूर की खेती में किसानों की दिलचस्पी बढ़ने की उम्मीद

30-Sep-2026 08:00 PM

सरसों एवं मसूर की खेती में किसानों की दिलचस्पी बढ़ने की उम्मीद

नई दिल्ली। केन्द्र सरकार ने रबी सीजन की फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में 1 से 10 प्रतिशत तक की वृद्धि कर दी है। इसके तहत गेहूं में सबसे कम तथा करडी (कुसुम या सैफ्लावर) में सर्वाधिक बढ़ोत्तरी हुई है।

इसी तरह मसूर एवं सरसों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में भी क्रमश: 390 रुपए प्रति क्विंटल एवं 413 रुपए प्रति क्विंटल की भारी बढ़ोत्तरी हुई है जिससे किसानों को इसका रकबा तथा उत्पादन बढ़ाने का अच्छा प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है। चना के समर्थन मूल्य में  83 रुपए तथा जौ के समर्थन मूल्य में 136 रुपए प्रति क्विंटल का इजाफा किया गया है। सैफ्लावर का समर्थन मूल्य सबसे ज्यादा 675 रुपए प्रति क्विंटल बढ़ा दिया गया है। 

केन्द्रीय पूल में गेहूं का विशाल स्टॉक मौजूद है और इसका दाम भी एक निश्चित सीमा में स्थिर बना हुआ है लेकिन देश में दलहन-तिलहन (दालों एवं खाद्य तेलों) का अभाव रहता है इसलिए विदेशों से इसके विशाल आयात की आवश्यकता पड़ती है। मसूर भारत में सर्वाधिक आयात होने वाले दलहनों में से एक है।

हालांकि सरसों का थोक मंडी भाव इस वर्ष न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से काफी ऊंचा चल रहा है जिससे इसकी खेती के प्रति किसानों का उत्साह एवं आकर्षण स्वाभाविक रूप से बढ़ जाएगा। मगर सरकार भी अपनी ओर से किसानों को प्रोत्साहित करना चाहती है। सरकार ने रबी कालीन फसलों के उत्पादन का लक्ष्य भी निर्धारित कर दिया है। शीघ्र ही गेहूं, सरसों, चना एवं अन्य रबी फसलों की बिजाई आरंभ होने वाली है लेकिन कुछ राज्यों में सूखे का संकट बना हुआ है।