सरसों का रकबा औसत क्षेत्रफल के करीब पहुंचा
02-Dec-2025 05:36 PM
नई दिल्ली। देश के सभी प्रमुख उत्पादक राज्यों में सरसों की जोरदार बिजाई का सिलसिला अभी जारी है जबकि इसका रकबा पंचवर्षीय औसत क्षेत्रफल के काफी करीब पहुंच चुका है और जल्दी ही उससे आगे निकल सकता है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार चालू रबी सीजन में 28 नवम्बर 2025 तक राष्ट्रीय स्तर पर सरसों का उत्पादन क्षेत्र उछलकर 77.06 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया जो पिछले साल की समान अवधि के बिजाई क्षेत्र 72.92 लाख हेक्टेयर से 4.14 लाख हेक्टेयर ज्यादा और सामान्य औसत क्षेत्रफल 79.17
लाख हेक्टेयर से 2.11 लाख हेक्टेयर कम है। सबसे प्रमुख उत्पादक प्रान्त- राजस्थान में बिजाई की गति काफी तेज रहने से अब यह अंतिम चरण में पहुंच गई और क्षेत्रफल गत वर्ष से आगे चल रहा है।
इसके अलावा उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हरियाणा, गुजरात, पश्चिम बंगाल, आसाम और बिहार सहित अन्य उत्पादक राज्यों में भी किसान सरसों की खेती में जबरदस्त उत्साह दिखा रहे हैं क्योंकि पिछले कई महीनों में इसका थोक मंडी भाव काफी ऊंचा होने से किसानों को आकर्षक आमदनी प्राप्त हो रही है।
सरकार ने सरसों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में अच्छी वृद्धि कर दी है और मौसम की हालत भी इसकी बिजाई के लिए अनुकूल बनी हुई है। उम्मीद की जा रही है कि इस बार रबी सीजन की इस सबसे प्रमुख तिलहन फसल- सरसों का सकल उत्पादन क्षेत्र बढ़कर 100 लाख हेक्टेयर के आसपास पहुंच सकता है।
दूसरी ओर अन्य रबी फसलों का रकबा गत वर्ष के बराबर या उससे पीछे चल रहा है। इसके तहत मूंगफली का उत्पादन क्षेत्र 1.94 लाख हेक्टेयर से घटकर 1.35 लाख टन तथा अलसी का बिजाई क्षेत्र 1.79 लाख हेक्टेयर से गिरकर 1.15 लाख हेक्टेयर पर अटक गया।
सैफ्लावर के रकबे में बढ़ोत्तरी हुई है जबकि सूरजमुखी एवं तिल का क्षेत्रफल गत वर्ष के लगभग बराबर ही है। रबी कालीन तिलहन फसलों का कुल उत्पादन क्षेत्र 80.53 लाख हेक्टेयर पर पहुंच चुका है।
