सीसीआई के पास रूई का विशाल स्टॉक उपलब्ध होने से टेक्सटाइल मिलों की चिंता घटी

03-Apr-2025 07:44 PM

नई दिल्ली। केन्द्रीय कपड़ा मंत्रालय की अधीनस्थ एजेंसी- भारतीय कपास निगम (सीसीआई) द्वारा 2024-25 के वर्तमान मार्केटिंग सीजन (अक्टूबर- सितम्बर) के दौरान प्रमुख उत्पादक राज्यों में किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर अब तक 100 लाख (1 करोड़) गांठ रूई की खरीद की जा चुकी है जबकि खरीद की प्रक्रिया अभी जारी है।


26 मार्च 2025 तक निगम द्वारा तेलंगाना में सर्वाधिक 40.38 लाख गांठ, महाराष्ट्र में 29.34 लाख गुजरात में 14.10 लाख एवं कर्नाटक में 5.22 लाख गांठ रूई की खरीद की गई जबकि प्रत्येक गांठ 170 किलो की होती है।


इसके अलावा मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान एवं उड़ीसा जैसे राज्यों में भी रूई की सरकारी खरीद की गई। उड़ीसा को छोड़कर अन्य राज्यों में बीटी कॉटन का उत्पादन होता है। 


केन्द्रीय कृषि मंत्रालय ने 2024-25 के वर्तमान सीजन में 294.27 लाख गांठ कपास के घरेलू उत्पादन का अनुमान लगाया है जिसके एक तिहाई भाग से अधिक की सरकारी खरीद हो चुकी है।


इससे साफ संकेत मिलता है कि कपास का घरेलू बाजार भाव सरकारी समर्थन मूल्य से काफी नीचे रहा। सरकार ने  2024-25 के मार्केटिंग सीजन हेतु कपास का न्यूनतम समर्थन मूल्य मीडियम रेशेवाली श्रेणी के लिए 7121 रुपए प्रति क्विंटल तथा लम्बे रेशेवाली किस्मों के लिए 7521 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित कर रखा है। 


सरकारी एजेंसी के पास लगभग एक करोड़ गांठ रूई का विशाल स्टॉक मौजूद रहने से टेक्सटाइल मिलों को इसकी आपूर्ति एवं उपलब्धता के प्रति कोई चिंता नहीं है लेकिन फिर विदेशों से अच्छी क्वालिटी की रूई का आयात जारी है। जरूरत पड़ने पर निगम द्वारा अपने स्टॉक से रूई का निर्यात  भी किया जा सकता है।


निगम ने घरेलू खरीदारों के लिए अपने स्टॉक से रूई की बिक्री आरंभ कर दी है लेकिन इसका ऑफर मूल्य ऊंचा होने से इसकी खरीद में व्यापारियों एवं मिलर्स की दिलचस्पी काफी कम है।


सीसीआई की रूई का ऑफर मूल्य इसलिए ऊंचा है क्योंकि इसकी खरीद एमएसपी पर की गई है जबकि घरेलू मंडियों में कपास का दाम न्यूतनम समर्थन मूल्य के आसपास या उससे नीचे चल रहा है।