सितम्बर में भारतीय चावल का औसत निर्यात मूल्य रहा सबसे प्रतिस्पर्धी
03-Oct-2025 05:45 PM
रोम। अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में भारतीय गैर बासमती चावल का निर्यात ऑफर मूल्य लम्बे समय से अन्य प्रमुख आपूर्तिकर्ता देशों की तुलना में प्रतिस्पर्धी या आकर्षक स्तर पर चल रहा है
और सितम्बर 2025 में भी इसका सिलसिला बरकरार रहा। संयुक्त राष्ट्र संघ की अधीनस्थ एजेंसी- खाद्य एवं कृषि संगठन (फाओ) के आंकड़ों से पता चलता है कि सितम्बर में भारत के 5 प्रतिशत टूटे सफेद चावल का निर्यात ऑफर मूल्य 374.70 डॉलर प्रति टन तथा 5 प्रतिशत सेला चावल का ऑफर मूल्य 353 डॉलर प्रति टन रहा।
इसके मुकाबले 5 प्रतिशत टूटे सफेद चावल का निर्यात ऑफर मूल्य अर्जेन्टीना में 487.6 डॉलर प्रति टन, ब्राजील में 504.50 डॉलर प्रति टन, उरुग्वे में 500.90 डॉलर प्रति टन दर्ज किया गया।
इन तीनों लैटिन अमरीकी देशों में चावल का निर्यात ऑफर मूल्य अक्सर एशिया से काफी ऊंचा रहता है। फाओ की रिपोर्ट के मुताबिक सितम्बर माह के दौरान अमरीका के 4 प्रतिशत टूटे एवं नंबर 2 ग्रेड के सामान्य चावल का औसत निर्यात ऑफर मूल्य बढ़कर 602.50 डॉलर प्रति टन पर पहुंच गया।
जहां तक भारत को छोड़कर अन्य एशियाई आपूर्तिकर्ता देशों का सवाल है तो वहां 5 प्रतिशत टूट के अंश वाले सफेद चावल का औसत निर्यात ऑफर मूल्य पाकिस्तान में 362.50 डॉलर प्रति टन तथा वियतनाम में 372.10 डॉलर प्रति टन दर्ज किया गया।
थाईलैंड में 100 प्रतिशत बी ग्रेड के सफेद चावल का निर्यात ऑफर मूल्य 389.30 डॉलर प्रति टन तथा 100 प्रतिशत सेला चावल एवं ऑफर मूल्य 394.30 डॉलर प्रति टन रहा। म्यांमार तथा कम्बोडिया से भी चावल का अच्छा निर्यात होता है।
भारत दुनिया में चावल का सबसे प्रमुख आपूर्तिकर्ता देश बना हुआ है और सम्पूर्ण वैश्विक निर्यात में इसका योगदान 40-42 प्रतिशत रहता है। चावल के निर्यात में यद्यपि थाईलैंड दूसरे तथा वियतनाम तीसरे नम्बर पर रहता है मगर ये दोनों ही भारत से बहुत पीछे है।
भारत में धान की नई फसल की कटाई-तैयारी का सीजन औपचारिक तौर पर 1 अक्टूबर से आरंभ हो गया है जिससे आगामी समय में चावल की आपूर्ति एवं उपलब्धता भी बढ़ती जाएगी।
सरकार के पास पहले से ही चावल का अत्यन्त विशाल स्टॉक मौजूद है जबकि घरेलू प्रभाग में इसकी आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति सुगम बनी हुई है।
डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपए की विनिमय दर भी नीचे आ गई है। आगामी महीनों में भारत से चावल के निर्यात में अच्छी बढ़ोत्तरी होने के आसार हैं।
