सोयाबीन के बजाए मक्का की तरफ किसानों के झुकाव से तिलहन-तेल मिशन की बढ़ेगी चुनौती

16-Dec-2024 01:11 PM

नई दिल्ली । इस वर्ष खरीफ सीजन में राष्ट्रीय स्तर पर मक्का के उत्पादन क्षेत्र में अच्छी बढ़ोत्तरी हुई थी और रबी सीजन में भी क्षेत्रफल कुछ आगे चल रहा है।

दरअसल एथनॉल निर्माण में मक्का के लगतार बढ़ते उपयोग के कारण इस महत्वपूर्ण मोटे अनाज की मांग, खपत एवं कीमत में नियमित रूप से इजाफा हो रहा है और किसानों को अच्छी आमदनी प्राप्त हो रही है जिससे इसकी खेती के प्रति उसका उत्साह एवं आकर्षण बढ़ता जा रहा है।

इससे तिलहन फसलों और खासकर सोयाबीन की खेती पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है क्योंकि इसका दाम घटकर काफी नीचे आ गया है।

हालांकि खरीफ सीजन के दौरान राष्ट्रीय स्तर पर कुल मिलाकर सोयाबीन के बिजाई क्षेत्र में वृद्धि हुई थी मगर कुछ प्रांतों में रकबा घट गया था क्योंकि वहां किसानों ने मक्का की खेती को प्राथमिकता दी थी। 

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार मक्का को अभी तक महज एक मोटा अनाज माना जाता था मगर अब यह एक महत्वपूर्ण नकदी फसल में बदल गया है।

यदि इसका दायरा फैलता रहा तो तिलहन फसलों का रकबा सिकुड़ सकता है जिससे राष्ट्रीय तेल-तिलहन मिशन को तिलहनों का क्षेत्रफल और उत्पादन बढ़ाने के अपने प्रयास में गंभीर चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। 

यद्यपि खरीफ कालीन मक्का का उत्पादन क्षेत्र वर्ष 2024 में सुधरकर 83.95 लाख हेक्टेयर पर पहुंचा जो वर्ष 2024 के बिजाई क्षेत्र 83.29 लाख हेक्टेयर से कुछ ही ज्यादा था मगर मध्य प्रदेश एवं महाराष्ट्र जैसे राज्यों में इसके क्षेत्रफल में 3 से 5 लाख हेक्टेयर तक का इजाफा देखा गया जो परम्परागत रूप से सोयाबीन का सबसे प्रमुख उत्पादक राज्य है।

विश्लेषकों के अनुसार विभिन्न फसलों के रकबे में संतुलित समीकरण का होना आवश्यक है। यह ध्यान रखना होगा कि किसी एक फसल की वजह से दूसरी फसल के रकबे में कटौती न हो जाए।

देश को मक्का की भांति तिलहन-तेल का उत्पादन बढ़ाने की सख्त आवश्यकता है क्योंकि भारत दुनिया में खाद्य तेलों का सबसे बड़ा आयातक देश बना हुआ है और इसके आयात पर अत्यन्त विशाल धनराशि खर्च हो रही है। 

एथनॉल नीति जरुरी है और एथनॉल का उत्पादन बढ़ाना भी आवश्यक है लेकिन तिलहनों की कीमत पर मक्का का उत्पादन बढ़ाना व्यावहारिक नहीं है।

धान-गेहूं का रकबा काफी हद तक स्थिर बना हुआ है इसलिए मक्का का बिजाई क्षेत्र बढ़ने से दलहन-तिलहन फसलों के बिजाई क्षेत्र में गिरावट की आशंका बनी रहेगी।