शुल्क मुक्त दलहनों के विशाल सस्ते आयात से घरेलू किसानों को नुकसान

20-Mar-2025 08:34 PM

नई दिल्ली। भारत में तुवर, उड़द, पीली मटर, देसी चना एवं मसूर जैसे प्रमुख दलहनों का विशाल आयात होने से घरेलू बाजार में आपूर्ति एवं उपलब्धता काफी बढ़ गई।

चूंकि इन दलहनों का शुल्क मुक्त आयात हो रहा है इसलिए यह सस्ता बैठता है और घरेलू बाजार मूल्य पर भारी दबाव डाल रहा है इसलिए स्वदेशी दलहनों का दाम भी घटकर काफी नीचे आ गया है। सम्पूर्ण दाल-दलहन बाजार में सुस्ती और नरमी का माहौल बना हुआ है। 

इंडिया पल्सेस एंड ग्रेन्स एसोसिएशन (आईपीजीए) के चेयरमैन ने भी कहा है कि देश में पीली मटर तथा देसी चना का जरूरत से ज्यादा आयात हो गया जबकि इसकी आवश्यकता नहीं थी। पीली मटर का आयात काफी सस्ते दाम पर हुआ और इसने देसी चना के बाजार को दबाना शुरू कर दिया।

स्वयं देसी चना का आयात उछलकर नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया जिससे अन्य दलहनों की मांग प्रभावित होने लगी। तुवर का आयात भी नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा। उड़द एवं मसूर का भी भारी आयात हुआ। 

व्यापार विश्लेषकों का कहना है कि पिछले साल जब दाल-दलहनों के दाम में जोरदार तेजी का दौर चल रहा था तब सरकार ने अपने किसानों के हितों की परवाह किए बगैर मूंग को छोड़कर सभी प्रमुख दलहनों के आयात को प्रोत्साहन देना शुरू कर दिया।

भारतीय दलहन उत्पादकों को पहले आकर्षक एवं लाभप्रद मूल्य प्राप्त हो रहा था मगर सरकारी नीतियों के कारण अब उन्हें नुकसान होने लगा है।

लगभग सभी दलहनों का घरेलू बाजार भाव घटकर न्यूनतम समर्थन मूल्य के आसपास या उससे नीचे आ गया है। इसे देखते हुए सरकार को बाजार हस्तक्षेप योजना के तहत किसानों से भारी मात्रा में दलहन खरीदने की जरूरत पड़ेगी।

वैसे भी केंद्रीय बफर स्टॉक में दलहनों की मात्रा घटकर स्वीकृत या मान्य स्तर से काफी कम रह गई है।