तिलहनों का एमएसपी तेल रिकवरी पर आधारित करने का सुझाव
03-Oct-2025 08:30 PM
नई दिल्ली। कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (सीएसीपी) ने 2026-27 फसलों के लिए अपनी नवीनतम मूल्य नीति रिपोर्ट में सरसों एवं सैफ्लावर जैसी तिलहन फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को उसमें मौजूद तेल के अंश के करने का सुझाव दिया है।
इस सुझाव का उद्देश्य किसानों को अधिक तेल की मौजूदगी वाली तिलहन फसलों की ज्यादा से से ज्यादा खेती करने के लिए प्रोत्साहित करना और बेहतर वापसी सुनिश्चित करना है। सरसों रबी सीजन की सबसे प्रमुख तिलहन फसल हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) द्वारा सरसों एवं सैफ्लावर की ऐसी अनेक कई प्रजातियों / किस्मों का विकास किया गया है जिसकी उपज दर ऊंची होती है और जिसमें तेल का ऊंचा अंश मौजूद रहता है।
इन फसलों के प्रबंधन की नई तकनीक एवं प्रक्रिया भी विकसित की गई है। इसकी खेती का दायरा बढ़ाने के लिए किसानों को भरपूर प्रोत्साहन देने की जरूरत है।
सरसों में तेल का अंश औसतन 34-38 प्रतिशत तथा सैफ्लावर में 27-28 प्रतिशत के बीच रहता है। इसे आधार बनाया जा सकता है और इस पर 42 प्रतिशत के कंडीशन वाली सरसों का मूल्य निर्धारित किया जा सकता है।
सरसों के तेल 34 प्रतिशत तथा सैफ्लावर ले लिए 28 प्रतिशत तेल के बेंचमार्क अंश से ऊपर प्रत्येक 0.25 प्रतिशत बिंदु की वृद्धि के हिसाब से न्यूनतम समर्थन मूल्य का निर्धारित करने का सुझाव दिया गया है। इससे खासकर सरसों का क्षेत्रफल एवं उत्पादन बढ़ाने में अच्छी सहायता मिल सकती है।
उद्योग समीक्षकों के अनुसार 2023-24 के मार्केटिंग सीजन के दौरान देश में करीब 160 लाख टन खाद्य तेलों का आयात हुआ जिस पर लगभग 1.32 लाख करोड़ की राशि खर्च हुई। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व 2021-22 के मार्केटिंग सीजन (नवम्बर-अक्टूबर) में खाद्य तेलों के आयात पर होने वाला।
खर्च उछलकर 1.57 लाख करोड़ रुपए के शीर्ष स्तर पर पहुंच। नवम्बर 2024 से आरंभ होकर अक्टूबर 2025 में समाप्त होने वाले वर्तमान मार्केटिंग सीजन में भी खाद्य तेलों का आयात खर्च ऊंचा रहने की संभावना है। मई 2025 से खाद्य तेलों के आयात में लगातार भारी बढ़ोत्तरी देखी जा रही है।
