थोक मंडियों में दाम घटने के बावजूद दलहनों का खुदरा बाजार भाव ऊंचा

31-Dec-2024 01:03 PM

मुम्बई । दलहनों में महंगाई की दर जून 2023 से ही दोहरे अंकों में चल रही है क्योंकि इसकी प्रमुख श्रेणियों का घरेलू उत्पादन कमजोर रहा था। 2023-24 सीजन के दौरान तुवर, उड़द एवं चना जैसे दलहनों की पैदावार में काफी कमी आ गई थी।

उड़द का न्यूनतम समर्थन मूल्य इस बार 7400 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है जबकि इसका मंडी भाव इसके आसपास ही चल रहा है। लेकिन खुदरा बाजार भाव अब भी ऊंचे स्तर पर बरकरार है।

खरीफ कालीन नई फसल की नियमित आवक जारी रहने तथा विदेशों से भारी आयात होने के कारण थोक कीमतों में तो गिरावट देखी जा रही है लेकिन खुदरा बाजार पर इसका कोई विशेष असर नहीं देखा जा रहा है। 

उपभोक्ता मामले विभाग के अनुसार चालू सप्ताह के पहले दिन यानी 30 दिसम्बर को मॉडल खुदरा मूल्य तुवर दाल का 160 रुपए प्रति किलो, उड़द दाल का 120 रुपए प्रति किलो तथा चना दाल का 90 रुपए प्रति किलो चल रहा था। पिछले तीन माह से इन दालों का खुदरा मूल्य लगभग इसी स्तर के आसपास स्थिर बना हुआ है।

विभाग ने रिटेलर्स से थोक भाव के अनुरूप दालों का खुदरा मूल्य घटाने का आग्रह किया है। विभाग के मुताबिक पिछले दो महीनों के दौरान तुवर, उड़द, चना,मसूर, मूंग एवं पीली मटर जैसी दालों के थोक मूल्य में 5 से 20 प्रतिशत तक की गिरावट आ चुकी है मगर खुदरा भाव पिछले स्तर पर ही अटका हुआ है।

सरकार विभिन्न दलहनों के शुल्क मुक्त आयात की स्वीकृति पहले ही दे चुकी है जिससे विदेशों से अच्छी मात्रा में इसका आयात हो रहा है और घरेलू प्रभाग में इसकी आपूर्ति उपलब्धता की हालत सुधरती जा रही है।

उद्योग-व्यापार समीक्षकों के अनुसार आगामी कुछ सप्ताह के दौरान दाल-दलहन के खुदरा बाजार भाव में भी थोड़ी-बहुत नरमी आने की उम्मीद है। 

तुवर और उड़द के नए माल की आपूर्ति शुरू होने से थोक कीमतों पर दबाव पड़ने लगा है। तुवर का उत्पादन इस बार बेहतर रहने के आसार हैं।

चना का दाम भी नरम देखा जा रहा है क्योंकि देसी चना के साथ-साथ पीली मटर का भारी आयात भी हो रहा है। साबुत दलहनों की कीमतों में नरमी आने का असर दालों के खुदरा भाव पर पड़ना चाहिए।