दक्षिण भारत के बांधों में पानी के स्टॉक में चिंताजनक स्तर तक गिरावट

15-May-2026 04:09 PM

हैदराबाद। दक्षिण भारत के बांधों-जलाशयों में पानी का स्टॉक चिंताजनक स्तर तक घट गया है और लम्बे समय से वहां अच्छी बारिश का अभाव देखा जा रहा है। दूसरी ओर लगातार बढ़ते तापमान एवं भीषण गर्मी के प्रकोप से खासकर बागानी फसलों को नुकसान हो रहा है जिसमें चाय, कॉफी, प्राकृतिक रबड़, सुपारी एवं छोटी इलायची सहित अन्य मसाला  फसल भी शामिल है। छोटी इलायची के नए माल की तुड़ाई-तैयारी आमतौर पर जून के अंत या जुलाई के आरंभ में शुरू हो जाती है। 

दक्षिण भारत के 47 प्रमुख जलाशयों में फिलहाल केवल 14.051 बिलियन क्यूबिक मीटर (बीसीएम) पानी का स्टॉक बचा हुआ है जो इसकी कुल भंडारण क्षमता 55.288 बीसीएम का महज 25 प्रतिशत है। इसमें भी तेलंगाना की हालत सबसे खराब बताई जा रही है क्योंकि उसके जलाशयों में कुल भंडारण क्षमता के मुकाबले सिर्फ 20 प्रतिशत पानी का स्टॉक मौजूद है। पानी का स्टॉक कर्नाटक के बांधों में 22 प्रतिशत, केरल में 24 प्रतिशत, तमिलनाडु में 34.5 प्रतिशत तथा आंध्र प्रदेश के जलाशयों में 37 प्रतिशत बचा हुआ है।

अगर शीघ्र ही वहां उच्च बारिश नहीं हुई तो बांधों-सरोवरों में जल स्तर घटकर और भी नीचे आ जाएगा। कुछ जलाशयों में पानी का स्टॉक इतना कम है कि उसके सूखने का खतरा पैदा हो गया है। इससे पेयजल की आपूर्ति के साथ फसलों की सिंचाई के लिए पानी का गंभीर संकट उत्पन्न हो सकता है। 

उल्लेखनीय है कि तेलंगाना दक्षिण भारत में धान-चावल का सबसे प्रमुख उत्पादक राज्य है। वहां धान की खेती मुख्यतः जलाशयों के पानी पर आश्रित रहती है जिसमें इस बार पानी का बहुत कम स्टॉक बचा हुआ है। वहां तेलंगाना कपास के उत्पादन में भी सबसे आगे है। खेतों की मिटटी सख्त हो गई है क्योंकि उसमें नमी नहीं है। अगले महीने से दक्षिण-पश्चिम मानसून की बारिश शुरू होने की संभावना है।