ऊंचे समर्थन मूल्य के सहारे कपास का रकबा बढ़ने की उम्मीद
15-May-2026 06:01 PM
नई दिल्ली। केन्द्र सरकार ने कपास की बिजाई, उत्पादकता एवं पैदावार बढ़ाने के लिए एक तरफ विशाल धनराशि के साथ कॉटन मिशन आरंभ किया है तो दूसरी ओर इसके न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में भी भारी बढ़ोत्तरी कर दी है। इससे किसानों को कपास का क्षेत्रफल एवं उत्पादन बढ़ाने का अच्छा प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है। कपास के एमएसपी में पिछले तीन साल से जबरदस्त बढ़ोत्तरी की जा रही है मगर इसका रकबा बढ़ने के बजाए घटता जा रहा है। इससे उत्पादन में भी कमी आ रही है।
2026-27 के मार्केटिंग सीजन के लिए केन्द्र सरकार ने कपास (रूई) के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में 557 रुपए प्रति क्विंटल की जबरदस्त बढ़ोत्तरी कर दी है। इसके फलस्वरूप 2025-26 की तुलना में 2026-27 सीजन के लिए रूई का एमएसपी मीडियम ग्रेड के लिए 7710 रुपए से बढ़कर 8267 रुपए प्रति क्विंटल तथा लम्बे रेशेवाली श्रेणी के लिए 8110 रुपए से बढ़कर 8667 रुपए प्रति क्विंटल हो गया है।
रूई का थोक मंडी भाव अक्सर न्यूनतम समर्थन मूल्य से काफी नीचे रहता है (सीसीआई) को मंडियों में हस्तक्षेप करके किसानों से विशाल मात्रा में इसकी खरीद करनी पड़ती है। 2025-26 के मौजूदा मार्केटिंग सीजन (अक्टूबर-सितम्बर) के दौरान सीसीआई द्वारा एमएसपी पर करीब 100 लाख गांठ (170 किलो की प्रत्येक गांठ) रूई की खरीद की गई।
ऊंचे समर्थन मूल्य से कपास के उत्पादकों को तो राहत मिलेगी लेकिन वस्त्र उद्योग की कठिनाई बढ़ जाएगी। ऊंचे दाम पर रूई खरीदने से वस्त्र उत्पादों का लागत खर्च बढ़ जाएगा जिससे अंतर्राष्ट्रीय निर्यात बाजार में उसकी प्रतिस्पर्धी क्षमता घट जाएगी। इससे निर्यात पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। विदेशों से आयात बढ़ने की संभावना रहेगी।
