दक्षिण-पश्चिम मानसून में ठहराव- जून में सक्रियता कम और जुलाई में ज्यादा रहेगी
04-Jun-2025 04:38 PM
तिरुअनन्तपुरम। शुरूआती धमा चौकड़ी मचाने के बाद दक्षिण-पश्चिम मानसून में अब ठहराव आने लगा है और इसकी तीव्रता तथा गतिशीलता काफी घट गई है। यह एक निश्चित ट्रैक पर स्थिर हो गया है जो मुम्बई के साथ अहिल्यानगर, आदिलाबाद, भवानीपटना, पुरी, सैंड हेड द्वीप तथा बालुर घाट के साथ जुड़ा हुआ है। यूरोपीय मौसम पूर्वानुमान केन्द्र ने कहा है कि अब दक्षिण-पश्चिम मानसून जुलाई के आरंभिक दो सप्ताहों में ही पूरे तामझाम के साथ सक्रिय हो सकता है। उल्लेखनीय है कि जून से सितम्बर के चार महीनों में सक्रिय रहने वाले मानसून के सीजन में जुलाई के सर्वाधिक वर्षा वाला महीना माना जाता है।
मौसम पुर्वानुमान केन्द्र के अनुसार जून के अंतिम सप्ताह में बंगाल की खाड़ी में हलचल दोबारा तेज हो सकती है क्योंकि तमिलनाडु एवं आंध्र प्रदेश तट के पास एक सर्कुलेशन बनने के आसार हैं। इधर भारतीय मौसम विभाग ने संकेत दिया है कि चालू माह (जून) के दौरान मानसून स्वयं को सुधरने तथा आगे बढ़ने का प्रयास कर सकता है क्योंकि उसे एक आगामी पश्चिम विक्षोभ का सहारा मिलने की उम्मीद है जिसका ट्रैक दक्षिणी पश्चिमी उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, विदर्भ से लेकर तटीय आंध्र प्रदेश तक फैला हो सकता है। इस ट्रफ के आंध्र प्रदेश तट से दूर बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक मानसून हितैषी साइक्लोनिक सर्कुलेशन के रूप में उभरने की उम्मीद है जिससे वर्षा सहित पूर्वी हवा का प्रवाह पूर्वी भारत में बारिश करवा सकता है और इसका दायरा एक तरफ मध्यवर्ती भारत की तरफ तो दूसरी ओर दक्षिणी प्रायद्वीपीय क्षेत्र तक विस्तृत हो सकता है।
इसके फलस्वरूप केरल, कर्नाटक, रायल सीमा, तेलंगाना, उड़ीसा, छत्तीसगढ़, विदर्भ एवं पूर्वी मध्य प्रदेश के कुछ भाग में बारिश हो सकती है। लेकिन उसके बाद 16 से 23 जून वाले सप्ताह के दौरान दक्षिण भारत में वर्षा का अभाव रहेगा। इस अवधि के दौरान देश के पश्चिमोत्तर भाग तथा उससे सटे मध्यवर्ती क्षेत्र में कहीं-कहीं बौछार पड़ने की उम्मीद है। इसमें दिल्ली, हरियाणा, चंडीगढ़, उत्तर प्रदेश तथा पश्चिमी मध्य प्रदेश शामिल है।
