दलहनों के आयात पर अंकुश लगाने का आग्रह

28-May-2025 05:57 PM

नई दिल्ली। विदेशों से सस्ते दाम पर दलहनों का बेतहाशा आयात होने से घरेलू बाजार का ताना बाना छिन्न-भिन्न हो गया है। लगभग सभी दलहनों का भाव घटकर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के निकट या उससे नीचे आ गया है जिससे किसानों के साथ-साथ व्यापारियों को भी भारी नुकसान हो रहा है।

एक अग्रणी व्यापारिक संस्था- दिल्ली ग्रेन मर्चेंट्स एसोसिएशन (डीजीएमए) के उपाध्यक्ष गौरव गुप्ता ने सरकार से दलहनों के आयात पर अंकुश लगाने हेतु तत्काल आवश्यक एहतियाती कदम उठाने का आग्रह किया है।

इसके साथ ही उन्होंने साप्ताहिक स्टॉक खुलासा (वीकली स्टॉक डिसक्लोजर) का आदेश भी वापस लेने की मांग की है क्योंकि इससे कारोबारियों एवं बाजार में घबराहट का माहौल रहता है। 

डीजीएमए के उपाध्यक्ष के अनुसार देश में मांग एवं खपत से बहुत ज्यादा दलहन का आयात हो रहा है जिससे घरेलू प्रभाग में इसकी आपूर्ति एवं उपलब्धता काफी बढ़ गई है उदाहरणस्वरूप पीली मटर की वार्षिक जरूरत 15 लाख टन की रहती है

जबकि इसका आयात 30 लाख टन पर पहुंच गया यानी दो वर्षों की खपत के लायक स्टॉक का आयात एक ही साल में हो गया। शुल्क मुक्त होने के कारण इसका आयात काफी सस्ता बैठ रहा है और इसलिए अन्य दलहनों की कीमतों पर भी जोरदार दबाव पड़ रहा है। 

केन्द्रीय बफर स्टॉक के लिए सरकार द्वारा इस वर्ष अब तक करीब 5.62 लाख टन तुवर की खरीद की जा चुकी है जिससे बाजार में इसकी उपलब्धता बढ़ाने में सहायता मिलेगी।

खरीफ फसलों की बिजाई होने वाली है और ऐसे समय में बाजार भाव नीचे होने से किसानों के उत्साह में कमी आ सकती है। सरकार को ऐसा तंत्र विकसित करना चाहिए जिससे देश में केवल जरूरत के लायक दलहनों का आयात सुनिश्चित हो सके और उसका आयात मूल्य सरकारी समर्थन मूल्य से ऊंचा रहे।

किसानों को उसके दलहनों का ऊंचा एवं आकर्षक मूल्य दिलवाना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए। उत्पादकों को कम से कम न्यूनतम समर्थन मूल्य अवश्य मिलना चाहिए अन्यथा इसकी प्रासंगिकता समाप्त हो जाएगी।

दलहनों के विशाल आयात से निर्यातक देशों का खजाना भरा जा रहा है जबकि भारतीय किसानों को औने-पौने दाम पर अपना उत्पाद बेचने के लिए विवश होना पड़ रहा है। यह नीति सही नहीं है।