दलहनों में आत्मनिर्भरता का लक्ष्य हो रहा है दूर

28-Nov-2025 04:05 PM

नई दिल्ली। दाल-दलहन की घरेलू मांग एवं खपत लगातार तेजी से बढ़ती जा रही है लेकिन इसके अनुरूप उत्पादन में इजाफा नहीं हो रहा है। इस वर्ष भी खरीफ कालीन दलहनों के उत्पादन में गिरावट की आशंका है।

यद्यपि बिजाई क्षेत्र में कमी नहीं आई लेकिन बाढ़-वर्षा एवं जल-भराव के कारण फसल को काफी नुकसान हुआ। सरकार ने दलहनों के उत्पादन का जो अनुमानित आंकड़ा प्रस्तुत किया है वह भी पूरी तरह संदेह से मुक्त नहीं है।

उदाहरणस्वरूप कृषि मंत्रालय ने अरहर या तुवर का घरेलू उत्पादन पिछले सीजन के 36.24 लाख टन से महज 27 हजार टन घटकर चालू सीजन में 35.97 लाख टन रह जाने का अनुमान लगाया है

जबकि उद्योग व्यापार क्षेत्र का मानना है कि प्राकृतिक आपदाओं से फसल को हुई भारी क्षति को देखते हुए तुवर का वास्तविक उत्पादन सरकारी अनुमान से 4-5 लाख टन कम हो सकता है। महाराष्ट्र एवं कर्नाटक सहित कुछ अन्य राज्यों में तुवर की फसल काफी हद तक क्षतिग्रस्त हुई है।

इसी तरह उड़द का उत्पादन पिछले खरीफ सीजन के 13.41 लाख टन से 1.36 लाख टन घटकर इस बार 12.05 लाख टन पर अटकने की संभावना सरकार द्वारा व्यक्त की गई है। इसे भी पूरी तरह विश्वसनीय नहीं माना जा रहा है।

उद्योग-व्यापार क्षेत्र के अनुसार उड़द का उत्पादन 10 लाख टन से ज्यादा होना मुश्किल लगता है क्योंकि मध्य प्रदेश एवं महाराष्ट्र सहित कई अन्य महत्वपूर्ण उत्पादक राज्यों में इसकी फसल को विभिन्न प्राकृतिक आपदाओं से काफी नुकसान हुआ और फसल की औसत उपज दर के साथ क्वालिटी भी प्रभावित हुई।

नए माल की आवक तो जारी है लेकिन मंडियों में आपूर्ति का ज्यादा प्रेशर नहीं देखा जा रहा है। म्यांमार और ब्राजील से इसका भारी आयात भी जारी है।  

मूंग का मामला भी इससे ज्यादा भिन्न नहीं है। सरकार ने इसका घरेलू उत्पादन पिछले खरीफ सीजन के 17.74 लाख टन से 54 हजार टन गिरकर इस बार 17.20 लाख टन पर अटकने का अनुमान लगाया है।

यह सही है कि इसका बिजाई क्षेत्र गत वर्ष के लगभग बराबर ही रहा मगर राजस्थान एवं महाराष्ट्र जैसे राज्यों में फसल को अधिशेष वर्षा एवं बाढ़ से काफी नुकसान हुआ। इसकी नई फसल की आपूर्ति पहले ही शुरू हो चुकी है।

भारत में फरवरी 2022 से ही मूंग के आयात पर प्रतिबंध लगा हुआ है और घरेलू बाजार भाव भी एक निश्चित सीमा में स्थिर देखा जा रहा है।