देश के एक दर्जन से अधिक राज्यों में मानसून की सक्रियता बढ़ी
03-Jun-2025 03:29 PM
नई दिल्ली। पूर्वोत्तर राज्यों में लगातार हो रही मूसलाधार वर्षा से न केवल बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए है बल्कि जान माल का भी नुकसान हो रहा है। भारतीय मौसम विभाग ने पिछले दिन देश के 15 प्रांतों में बारिश का अलर्ट जारी किया था।
मौसम विभाग के मुताबिक दक्षिण-पश्चिम मानसून देश के अनेक राज्यों में सक्रिय हो चुका है जबकि इस बार मानसून-पूर्व की बारिश भी कई राज्यों में बहुत ज्यादा हुई।
दिलचस्प तथ्य यह है कि यह स्थिति 31 मई तक रही। अब जून का महीना शुरु हो चुका है जो मानसून का पहला महीना माना जाता है। पूर्वोत्तर भारत पहले ही जल सैलाब से अस्त-व्यस्त हो चुका है। दक्षिण राज्यों में भी मानसून सक्रिय है।
पश्चिमी भारत-बिहार तथा राजस्थान में बारिश हुई है। दिल्ली एनसीआर में अगले तीन दिनों के दौरान तेज हवा के साथ बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।
आसाम, मेघालय, मणिपुर, सिक्किम और पश्चिम बंगाल में वर्षा का दौर जारी है जबकि अगले 2-3 दिनों में पश्चिमोत्तर भारत में तेज हवा के साथ बारिश हो सकती है।
इसके अलावा केरल, तटीय कर्नाटक, दक्षिणी आंतरिक कर्नाटक, कोंकण तथा गोवा में भारी वर्षा होने का अलर्ट जारी किया गया है। आमतौर पर जुलाई के प्रथम सप्ताह में मानसून समूचे देश को कवर करता है लेकिन इस बार इसकी तीव्रता एवं गतिशीलता को देखते हुए प्रतीत होता है कि यह जून के दूसरे-तीसरे सप्ताह में ही देश के सभी भागों में पहुंच सकता है।
इससे किसानों को खरीफ फसलों की खेती जल्दी शुरू करने में सहायता मिलेगी। मौसम विभाग ने 1 और 2 जून को दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम, फरीदाबाद तथा गाजियाबाद में 40-50 कि०मी० की तेज हवा के साथ वर्षा होने की चेतावनी जारी की है। 3-4 जून को भी बारिश होने की संभावना व्यक्त की गई है।
उत्तर प्रदेश के पूर्वी एवं पश्चिमी भाग में 1 जून को गरज-चमक के साथ बौछार पड़ी जबकि 5 जून तक समूचे राज्य में बारिश होने का अनुमान लगाया है।
पिछले दिन आसाम, मेघालय, मणिपुर, नागालैंड, मिजोरम, मणिपुर, त्रिपुरा, पश्चिम बंगाल के उप हिमालयी क्षेत्र, केरल, कर्नाटक, उड़ीसा, झारखंड, छत्तीसगढ़, तटीय आंध्र प्रदेश, रायल सीमा तथा तेलंगाना में भारी बारिश हुई।
इसके अलावा जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, महाराष्ट्र एवं मध्य प्रदेश में भी बारिश दर्ज की गई। मानसून तेजी से आगे बढ़ रहा है और उसी तेजी से खरीफ फसलों की बिजाई भी बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।
